आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल लखनऊ ने 16 वर्ष से लापता सैनिक राजेश कुमार की पत्नी बिट्टन देवी को पेंशन देने के आदेश दिए हैं। साथ ही पीड़िता को एक लाख रुपये बतौर हर्जाना अदा करने के निर्देश देते हुए कहा कि पेंशन में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी की तनख्वाह से हर्जाने की रकम काटी जाए।
ट्रिब्यूनल के न्यायमूर्ति एसवीएस राठौर और बीबीपी सिन्हा की खंडपीठ ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए याची को एक लाख रुपये के हर्जाने के साथ पेंशन देने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि यदि चार महीने के अंदर निर्णय का पालन नहीं किया जाता है तो 9 फीसदी ब्याज भी देना होगा।
बिट्टन देवी ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी कि आर्टिलरी रेजीमेंट में गनर रहे उसके पति राजेश कुमार 5 मार्च 2003 को आर्टिलरी स्कूल देवलाली से ड्यूटी से लापता हो गया था। तीन साल बाद 20 अप्रैल 2006 को राजेश को भगोड़ा घोषित करके उसे सेना से बर्खास्त कर दिया गया। बिट्टन देवी ने इसे लेकर सेना के जिम्मेदार अधिकारियों को कई पत्र दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस पर 13 अगस्त 2006 को फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज थाने में पति की गुमशुदगी की दरख्वास्त दी। पुलिस ने मामले में एफआईआर न दर्ज कर इसे शिकायत के रूप में दर्ज किया और कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की। उसने एसपी फर्रुखाबाद से भी गुहार लगाई लेकिन कुछ नहीं हुआ।