अमौसी एयरपोर्ट पर पार्किंग स्टैंड में जगह कम होने के चलते इमरजैंसी लैंडिग की स्थिति में विमानों को अक्सर जयपुर, दिल्ली या पटना डायवर्ट कर दिया जाता है। अब इस समस्या का हल ढूंढ लिया गया है।
70 करोड़ रुपये से विमानों के लिए आठ पार्किंग स्टैंड बनाए जाएंगे। ये स्टैंड एटीसी बिल्डिंग के पास बनेंगे। सर्वेक्षण का काम पूरा हो गया है। मौजूदा समय में एयरपोर्ट पर 14 विमानों के लिए ही पार्किंग की जगह है।
उत्तर भारत में घना कोहरा या धुंध होने पर दिल्ली जाने वाली फ्लाइटों को अक्सर अमौसी एयपोर्ट की ओर डायवर्ट कर दिया जाता है। या फिर इमरजैंसी लैंडिंग में फ्लाइटों को यहां उतारा जाता है। हाल ही में काठमांडू व जेद्दा जाने वाले विमानों की लैंडिंग अमौसी एयरपोर्ट पर हुई थी।
कई बार ऐसा भी होता है,लखनऊ आने वाले विमानों को पार्किंग में जगह नहीं होने पर जयपुर-दिल्ली भेज दिया जाता है। अमौसी एयरपोर्ट के विशेष कार्य अधिकारी संजय नारायण का कहना है कि अभी 14 विमानों के लिए पार्किंग स्पेस है। आठ और बनाए जाएंगे।
इमरजेंसी लैंडिंग से होती है कमाई
जब एयरपोर्ट पर विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग होती से एयरपोर्ट प्रशासन को भी हजारों रुपये का मुनाफा होता है। यह तय मानकों के मुताबिक एयरलाइनों से वसूला जाता है।
ये सुविधाएं भी बढ़ेंगी
अपग्रेड होगा फायर फाइटिंग सिस्टम: अमौसी एयरपोर्ट की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फायर फाइटिंग सिस्टम को कैटेगरी आठ से बढ़ाकर कैटेगरी 9 करने की कवायद की जा रही है। इस पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
दो नए एरोब्रिज लगेंगे
एयरपोर्ट पर विमानों तक यात्रियों को पहुंचाने में इस्तेमाल होने वाले एरोब्रिज वर्षों पुराने हैं। इन्हें बदला जाएगा। इन पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी क्रम में रनवे की लम्बाई 583 मीटर बढ़ाई जा रही है।
अमौसी एयरपोर्ट पर सालाना घरेल व अंतर्राष्ट्रीय मिलाकर 39,68,950 पैसेंजर आते हैं, जबकि 29,306 विमानों का मूवमेंट होता है। एयरपोर्ट का रनवे 2,742 मीटर है, जोकि छोटा है।
इसकी लम्बाई 583 मीटर बढ़ाई जा रही है। जिससे एयरस्ट्रिप जयपुर, भोपाल, पटना, देहरादून से बड़ी हो जाएगी और विमानों की लैंडिंग व टेकऑफ आसान हो जाएगा।