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Lucknow News: लविवि में छह शिक्षकों की नियुक्ति पर लगी मुहर

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में सोमवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में छह शिक्षकों की नियुक्ति पर मुहर लगा दी गई। इनमें से चार संविदा और दो नियमित भर्तियां हैं। विवि के विभिन्न विभागों में सेवा दे रहे 10 शिक्षकों को कॅरिअर एडवांस स्कीम के तहत मिली प्रोन्नति को भी सहमति दे दी गई।
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वित्त समिति और परीक्षा समिति के निर्णयों को भी स्वीकृति मिली। कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, डीन व परिषद के सदस्यों की मौजूदगी रही।
प्रवक्ता प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि तीन विभागों में प्रोन्नति और तीन में नियुक्तियां की गई हैं। पहली बार एस्थेटिक एंड शैव फिलास्फी विभाग में प्रोफेसर पद पर नियुक्ति की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में चार संविदा सहायक आचार्य और वेस्टर्न हिस्ट्री विभाग में एक नियमित सहायक आचार्य को नियुक्त किया गया है।
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वाणिज्य विभाग में डॉ. सुनीता श्रीवास्तव, डॉ. गीतिका टी. कपूर को एसोसिएट से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति मिली है। अंग्रेजी विभाग में डॉ. मो. तारिक, डॉ. एचएन प्रसाद व डॉ. राजेश बाबू को एसोसिएट से प्रोफेसर, डॉ. विनीत मैक्सवेल डेविड को असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर और डॉ. राज गौरव वर्मा को असिस्टेंट प्रोफेसर स्टेज दो से तीन पर प्रमोट किया गया। अप्लाइड इकोनॉमिक्स में डॉ. नागेंद्र मौर्या को असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर और डॉ. करूणा शंकर कनौजिया व डॉ. जय लक्ष्मी शर्मा को भी प्रोन्नत किया गया है।

बैठक में तीन शिक्षकों के खिलाफ पूर्व में गठित समिति की रिपोर्ट रखी गई। कुलपति के मुताबिक, शिक्षकों के खिलाफ तीनों मामलों में नियमानुसार अनुशासनात्मक समिति गठित करने की संस्तुति दी गई। ये शिक्षक ओरिएंटल, अरेबिक एवं पर्सियन विभाग, मानवशास्त्र विभाग और अरेबिक विभाग से हैं।


कार्य परिषद पर उठाए सवाल

लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (लूटा) के उपाध्यक्ष डॉ. अरशद अली जाफरी ने कार्य परिषद पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कुलाधिपति राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र भी लिखा है। लूटा उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि कुलपति ने मन मुताबिक लोगों को कार्यपरिषद का सदस्य बनाया हुआ है। कई वर्षों से इनकी नियुक्ति के लिए चुनाव प्रक्रिया भी नहीं हुई है, जो विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 व परिनियमावली का उल्लंघन है। राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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