लखनऊ विश्वविद्यालय में बुधवार सुबह छह बजे से पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई। परीक्षा 16 मार्च से प्रस्तावित है। 70 नंबर की प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी सवाल शोध प्रविधि और 50 फीसदी संबंधित विषय पर आधारित होंगे। विषय के सवाल विवि में परास्नातक पर पढ़ाए जा रहे सिलेबस से होंगे। पीएचडी की 492 सीटों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख छह फरवरी और एक हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ 10 फरवरी तय की गई है।
पीएचडी में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आवेदन शुल्क दो हजार रुपये तथा एससी-एसटी वर्ग के लिए एक हजार रुपये तय किय गया है। आवेदन फॉर्म बुधवार से विवि की वेबसाइट पर जाकर भर सकते हैं। एक अभ्यर्थी को अधिकतम दो विषय में आवेदन करने की छूट दी गई है। इसके लिए उसे एक ही पंजीकरण नंबर का उपयोग करना होगा। हालांकि दो विषय में आवेदन करने में उन्हें फीस में कोई छूट नहीं मिलेगी और दो गुना फीस देनी होगी। अलग-अलग पंजीकरण करने पर अभ्यर्थी को दो आवेदक माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उसे सिर्फ एक विषय की प्रवेश परीक्षा देने का मौका ही दिया जाएगा।
अभी तय नहीं हुआ सिलेबस
पीएचडी प्रवेश परीक्षा में दो भाग होंगे। पहले भाग में शोध प्रविधि तथा दूसरे में विषय आधारित सवाल होंगे। परीक्षा बहु विकल्पीय प्रणाली पर होगी। शोध प्रविधि के प्रश्नपत्र में पूछी जाने वाले सिलेबस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। जल्द ही इस पर फैसला किया जाएगा। दूसरा पेपर पूरी तरह से विषय आधारित होगा। परीक्षा में 50 फीसदी अंक लाने पर ही उन्हें साक्षात्कार के योग्य माना जाएगा। साक्षात्कार 30 नंबर का होगा।
एससी-एसटी, ओबीसी को न्यूनतम अर्हता में पांच फीसदी छूट
पीएचडी के लिए आवेदन करने के लिए परास्नातक स्तर पर न्यूनतम 55 फीसदी अर्हता निर्धारित की गई है। हालांकि एससी-एसटी और ओबीसी अभ्यर्थियों को इसमें पांच फीसदी छूट मिलेगी। यह छूट केवल परास्नातक के अंकों में ही मान्य होगी। प्रवेश परीक्षा के अंक में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।
न्यूनतम तीन और अधिकतम छह वर्ष होगी अवधि
पीएचडी के लिए विवि ने यूजीसी की गाइडलाइन के हिसाब से न्यूनतम तीन और अधिकतम तीन छह साल अवधि निर्धारित की है। अधिकतम अवधि में दिव्यांग और महिला अभ्यर्थियों को दो वर्ष तक की छूट दी जा सकती है। महिला अभ्यर्थी पीएचडी के दौरान 240 दिन का प्रसूति और चाइल्ड केयर लीव भी ले सकेंगी।