कार्यक्रम में भजन पेश करते अनूप जलोटा।
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देश के लोकप्रिय भजन गायक पद्मश्री अनूप जलोटा का मानना है कि भजन को भजन की तरह ही गाना चाहिए, इसे पॉप की तरह प्रस्तुत करना ठीक नहीं है। वे बृहस्पतिवार को गोमतीनगर स्थित यूपी दर्शन पार्क में भजन संध्या में प्रस्तुति देने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की।
भजन सम्राट अनूप जलोटा ने कहा, बच्चा जब संसार में आता है तो उसके कमरे में भगवान श्रीकृष्ण की बाल्यकाल की तस्वीरें लगाई जाती हैं, ताकि उसमें भक्ति और अध्यात्म के गुण विकसित हों। बच्चे के कमरे में कभी माइकल जैक्सन की तस्वीर नहीं लगाई जाती है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, इधर कुछ समय से नए गायकों में भजन के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है जिसका सबसे बड़ा कारण है वातावरण। प्रदेश में आध्यात्मिक वातावरण का असर गायकों पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा, उम्र में क्या रखा है। मैं 71 साल का हो गया हूं फिर भी रोज पूरी ऊर्जा से काम कर रहा हूं। कहा, अपना मन खुश रखिए फिर देखिए कितना अच्छा परिणाम आता है।
...किसमें है जुर्रत जो हमसे छुड़ाए लखनऊ
लखनऊ को लेकर उन्होंने कहा, यह मेरा शहर है। इस शहर ने मुझे बहुत कुछ दिया है। आज जो कुछ भी हूं, उसमें लखनऊ का सबसे बड़ा योगदान है। इस दौरान मंच से उन्होंने कहा, लखनऊ हम पर फिदा है, हम फिदा-ए-लखनऊ, किसमें है जुर्रत जो हमसे छुड़ाए लखनऊ। मेरा सपना था कि लखनऊ में खास तौर पर एक आध्यात्मिक संगीत के लिए एकेडमी खुले। जलोटा एकेडमी ऑफ स्प्रिचुअल म्यूजिक एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स के जरिये मेरा यह सपना अब पूरा हो गया है।