लड़की से दोस्ती कर उसे गर्ल फ्रेंड बनाने के लिए ताबीज बांधना हो या कुत्ता काटने पर रैबीज से बचने के लिए किसी खास कुएं के पानी से पीड़ित को नहलाना।
ऐसे दर्जनों अंध विश्वास हैं जो राजधानी सहित पूरे प्रदेश में आम नागरिकों के दिमागों को जकड़े हुए हैं। बेहद अतार्किक और दकियानूसी ये अंधविश्वास आम लोगों की सोचने विचार की शक्ति को तो प्रभावित कर ही रहे हैं।
अब इनकी वजह से लोगों की जान भी ली जाने लगी है। इसे रोकने के लिए लखनऊ के प्रगतिशील समाज ने आवाज मुखर की है और प्रदेश में महाराष्ट्र की तरह अंधविश्वास रोकथाम कानून बनाने की मांग की है।
इस पहल में ज्ञान विज्ञान समिति उत्तर प्रदेश और ऑल इंडियन पीपुल्स साइंस नेटवर्क शामिल हैं। लखनऊ के विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के रिटायर्ड वैज्ञानिक भी सहयोग के लिए आगे आए हैं।
इसकी शुरुआत लखनऊ में सोमवार को होगी जब ये सभी जीपीओ पर जुटेंगे। वहां पर हाल में महाराष्ट्र में कट्टरपंथियों के हाथों मारे गए डॉ. नरेंद्र दाभोलकर को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
साथ ही प्रदेश के हालात पर विमर्श कर प्रमुख अंधविश्वास प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से प्रगतिशील सोच रखने वाले तर्कशास्त्रियों को बुलाया गया है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बीना गुप्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश में हालात महाराष्ट्र से भी बुरे हैं लेकिन इस दिशा में बात नहीं हो रही है। यह हमारा ही समाज है जहां तांत्रिक, अघोरी, ताबीज बेचने वालों से लेकर झाड़फूंक करने वालों को लोगों की जिंदगी से खेलने की छूट मिली हुई है।
बड़ी संख्या में लोग इनसे जान और माल का नुकसान उठा रहे हैं, लेकिन इन्हें रोकने पर कुछ नहीं हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लखनऊ से इस पर पहल हो, यहां बड़ी संख्या में विभिन्न साइंस संस्थानों के वैज्ञानिक हैं जो सोच विचार में प्रगतिशील हैं।
ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क के महासचिव संजीव सिन्हा बताते हैं कि अंधविश्वास को फैलाने में कम जागरुक लोग सबसे बड़ी कड़ी हैं। उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करके और जागरुकता बढ़ाकर इस सामाजिक बुराई की जड़ों पर प्रहार किया जा सकता है। और यही इस मुहिम का लक्ष्य होगा।