लखनऊ। अंसल कंपनी को दिवालिया घोषित करने का राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का आदेश सही था या नहीं, इस पर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी आईएलएंडएफएस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एनसीएलटी के सात जनवरी के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इससे सुशांत गोल्फ सिटी के करीब पांच हजार आवंटियों को राहत मिली है। इनमें प्रदेशभर के जिलों से निवेश करने वाले भी शामिल हैं। अंसल के खिलाफ वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बलिया व एनसीआर के पीड़ितों ने एफआईआर दर्ज करा रखी है।
एनसीएलटी ने एक वर्ष पहले अंसल को दिवालिया घोषित किया था। इस पर आवंटियों ने एनसीएलएटी में वाद करते हुए आरोप लगाया था कि ऐसा करने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। मामले में सात जनवरी को एनसीएलएटी ने एनसीएलटी के उस आदेश को तो खारिज नहीं किया, जिसमें अंसल को दिवालिया घोषित किया गया। हालांकि, एनसीएलटी को आवंटियों, एलडीए सहित अन्य का पक्ष सुनने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ आईएलएंडएफएस फाइनेंस कंपनी सुप्रीम कोर्ट गई थी, क्योंकि इस कंपनी के करीब 83 करोड़ रुपये बकाये पर ही अंसल को दिवालिया घोषित किया था।
इस पर पहली बार नौ अप्रैल को सुनवाई लगी थी, पर उस दिन सुनवाई नहीं हो पाई। बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में आदेश पर रोक लगाने की याचिका खारिज हो गई। इससे आवंटियों को राहत मिली है और अब वे एनसीएलटी की कार्रवाई के खिलाफ अपना पक्ष मजबूती से रख सकेंगे।
आवंटियों को मिली बड़ी राहत
आवंटी व निवेशक गगन टंडन ने कहा कि कोर्ट ने आवंटियों के हितों को समझते हुए बड़ी राहत दी है। एनसीएलटी ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए अंसल को दिवालिया घोषित किया था। इससे आवंटियों की गाढ़ी कमाई डूब रही थी, क्योंकि पैसा जमा करने के बाद उन्हें अंसल ने जमीन, प्लॉट और फ्लैट नहीं दिए थे। गगन ने यह भी कहा कि जितनी बकाया राशि पर अंसल को दिवालिया घोषित किया गया वह बहुत छोटी है। इससे अधिक की जमीन तो अंसल के लोगों ने दिवालिया घोषित होने के बाद बेच दी, क्योंकि कई महीने एनसीएलटी का आदेश सुरक्षित रहा था।