राजधानी लखनऊ में कांग्रेस की तरफ से भागीदारी न्याय महासम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें शामिल होने ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद पहुंचे। उन्होंने कहा कि देश में 90 फीसदी आबादी के लोग अभी तक उच्च पदों पर नहीं पहुंच पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट में 34 जज होते हैं। आजादी के बाद से करीब 500-700 लोग जज बन चुके हैं। सवाल यह है कि इसमें कितने एसी-एसटी, ओबीसी समुदाय के हैं? यदि वे यहां तक नहीं पहुचे तो इसकी कुछ तो वजह होगी। इन्हीं वजह को दूर करके जाति व धर्म के लोगों को हर पद के योग्य बनाना ही कांग्रेस का सपना है।
तेलंगाना मॉडल यानी एसईईईपीसी (सामाजिक, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक, राजनीतिक, जाति ) सर्वे। इसके लिए कमेटी बनाई गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुदर्शन रेड्डी, कांचा इलैया, डेटा साइंटिस्ट और प्रोफेशनल कांग्रेस के प्रमुख प्रवीण चक्रवतीं आदि शामिल हैं। ये सब मिलकर उस डेटा का अध्ययन कर रहे है जिसके मुताबिक नीतियों तैयार की जा रही हैं। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है जिसे बेहतर बनाने का क्रम चलता रहेगा।
यूपी में कांग्रेस की स्थिति में सुधार हो रहा है। लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं। ओबीसी विभाग सिर्फ नेता नहीं बल्कि एक्टिविस्ट को जिम्मेदारी दे रही है। ओबीसी की सभी जातियों को संगनात्मक ढांचे से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश की मुख्य कमेटी में भी इसकी झलक दिखेगी। जिन दिन हम भाजपा के झूठ को उजागर कर लेंगे उसी दिन उसका सफाया हो जाएगा। वक्त जरूर लग रहा है, लेकिन बदलाव होगा। आने वाला समय कांग्रेस का है।
जातिगत जनगणना से यह पता चल सकेगा कि किस वर्ग की क्या स्थिति है? फिर उसके उत्थान के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। इसी तरह भारतीय संविधान ने कुछ अधिकारों की गारंटी दी है, लेकिन इसके बारे में सबको पता नहीं। यही वजह है कि कांग्रेस ने लोगों में जागरूकता लाने के लिए संविधान सभा का आयोजन कर रही है।