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Lucknow News: धरना दे रहे छात्रों का 15वें दिन फूटा गुस्सा

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लखनऊ। लविवि में छात्रावास आवंटन में धांधली का आरोप लगा 15 दिन से परिसर में धरना दे रहे छात्रों का गुस्सा बृहस्पतिवार को एक और साथी के बीमार होने पर फूट पड़ा। बीमार छात्र को गोद में लेकर कुलपति कार्यालय पहुंचे छात्रों ने करीब तीन घंटे प्रदर्शन किया। चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी और पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस ने कुछ छात्रों को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
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छात्र नेता रिशेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि धरने पर बैठे छात्र बृहस्पतिवार को गुलाब और मांगपत्र लेकर कुलपति प्रो. जेपी सैनी से मिलने पहुंचे। आरोप है कि छात्रों को आता देख कुलपति कार में बैठकर चले गए। इससे नाराज छात्रों ने कुलपति कार्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। दोपहर करीब दो बजे धरने पर बैठे छात्र वेद त्रिपाठी की तबीयत बिगड़ने पर साथी उसे गोद में उठाकर वीसी कार्यालय पहुंचे थे। छात्रों का आरोप है कि उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद प्रदर्शन शुरू हुआ।
मेरिट सूची और रिक्त सीटों का ब्योरा मांगा

प्रदर्शन के बाद छात्रों ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अमिता कनौजिया, चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी और चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी को ज्ञापन सौंपा। इसमें छात्रावास आवंटन की उच्चस्तरीय जांच के लिए कमेटी गठित करने, 12 से 15 दिन में रिपोर्ट सार्वजनिक करने, मेरिट और कटऑफ सहित पूरी आवंटन सूची जारी करने तथा रिक्त सीटों का ब्योरा देने की मांग की गई। छात्रों ने सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित करने की मांग की।
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छात्रावासों की सभी सीटें आवंटित
विवि प्रशासन का कहना है कि जो भी सकारात्मक मांगें हैं, उन पर विचार किया जाएगा। मानक के अनुसार, कुछ छात्रों को अभी और कुछ छात्रों को कुछ दिन बाद छात्रावास की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। विवि प्रशासन के अनुसार मेरिट, आरक्षण और निर्धारित नियमों के आधार पर 17 छात्रावासों की सभी 2948 स्वीकृत सीटें आवंटित हो चुकी हैं। आवेदन से लेकर शुल्क भुगतान और आवंटन तक की प्रक्रिया ऑनलाइन हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से पूरी होती है। वर्ष 2022 से आवंटन सूचियां विवि की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जा रही हैं। कुछ कमरों में मरम्मत और रखरखाव के कारण उनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
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