भाजपा गठबंधन (राजग) के पास 325 विधायकों के वोट थे। पर राजग के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को 335 वोट मिले। अगर राजग के सभी 325 विधायकों के वोट वैध रहे तो दस और विधायकों ने कोविंद को वोट दिया।
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भले ही यह दस वोट संख्या के लिहाज से कम हों, लेकिन प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में न सिर्फ यह महत्वपूर्ण हो गए हैं, बल्कि निकट भविष्य में इनके दूरगामी नतीजे आने तय हैं।
सपा में हाशिए पर चल रहे शिवपाल सिंह यादव ने तो कोविंद को ऐलानिया वोट किया। उनके साथ आए निषाद पार्टी के विजय मिश्र, निर्दल अमनमणि के भी कोविंद के पक्ष में वोट डालने की खबरें सार्वजनिक हो चुकी हैं।
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निर्दल रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया और उनके नजदीकी विनोद सरोज का भी वोट कोविंद के पक्ष में जाने की चर्चा है। पर पहेली बने हैं वे पांच वोट जो इनके अलावा कोविंद के खाते में यूपी से आए हैं। भले ही विपक्ष यह दावा कर रहा हो कि उनके सभी विधायक पूरी तरह मीरा कुमार के साथ एकजुट रहे। लेकिन ये पांच वोट इनके दावों को झुठला रहे हैं।
भतीजे अखिलेश से दो-दो हाथ करने को तैयार शिवपाल
अखिलेश यादव व शिवपाल यादव
- फोटो : amar ujala
शिवपाल ने अपना वोट कोविंद के पक्ष में देकर यह जता दिया है कि सपा में सुलह की गुंजाइश अब खत्म हो चुकी है। अब वे भतीजे अखिलेश यादव से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।
खास बात यह है कि वह जब वोट डालने आए तो विजय मिश्र और निर्दल अमनमणि भी उनके साथ थे। इसका उल्लेख यह याद दिलाने के लिए है कि सपा में घमासान के बीच शिवपाल ने पहले इन सभी को टिकट दिया था। लेकिन अखिलेश ने नेतृत्व हथियाते ही इन सबका टिकट काट दिया।
संकेत साफ है कि आने वाले दिनों में शिवपाल की कोशिश अखिलेश को और कमजोर करने की होगी। वे अखिलेश विरोधियों को एकजुट करेंगे।
मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में संपूर्ण विपक्ष गठबंधन करके चुनाव लड़ेगा, इस संभावना को देखते हुए शिवपाल के इस अभियान में परदे के पीछे से भाजपा का भी समर्थन मिल जाए और विपक्ष बिखरा रहे।
कमजोर हो सकता है विपक्ष
अखिलेश यादव और सीएम योगी
राजा भैया ने अपने सहयोगी के साथ कोविंद को वोट देकर यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में वे भले ही भाजपा सरकार का हिस्सा न बनें, लेकिन अखिलेश के नेतृत्व वाली सपा के साथ वे भी नहीं रहने वाले हैं। मुलायम सिंह प्रभावी होते तो बात अलग थी।
वैसे भी राजा भैया और उनका परिवार पहले भी भाजपा का करीबी रहा है। पांच खुले वोटों से ज्यादा कोविंद के खाते में आए ये पांच वोट इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे पता चलता है कि ये विधायक सपा, बसपा या कांग्रेस जिस भी दल के हों, लेकिन इन्होंने भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर ली हैं। इनकी निष्ठा अब मौजूदा दल में नहीं है।
आने वाले दिनों में इनकीचौंकाने वाली भूमिका सामने आ सकती है और विपक्ष में बिखराव को और विस्तार दे सकती है।
कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोट करने वाले विधायकों की संख्या पांच है। भाजपा को अपने सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व डॉ. दिनेश शर्मा, परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र देव सिंह और मुस्लिम वक्फ व हज राज्य मंत्री मोहसिन रजा के लिए विधानमंडल के किसी सदन में पांच सीटें चाहिए।
कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं इन पांच सीटों व पांच वोटों में कोई रिश्ता तो नहीं। हालांकि भाजपा के सूत्र कहते हैं कि पार्टी इन पांचों को विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ाएगी, लेकिन ये भी स्वीकार करते हैं कि अलग-अलग दलों के कुछ विधायक संपर्क में हैं।
इनमें से कुछ ने पहले ही भाजपा के सीएम व डिप्टी सीएम के लिए सीट खाली करने की पेशकश की थी। पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। खैर जो भी हो लेकिन कोविंद के पक्ष में क्रॉस हुए ये पांच वोट इतना बताने के लिए पर्याप्त हैं कि आने वाले दिनों में प्रदेश में बड़ी सियासी उथल-पुथल होगी।
लखनऊ में पड़े वोट--405
सांसद--3 (सभी भाजपा)
(योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य और उमा भारती)
विधायक--402
भाजपा गठबंधन--325
विपक्ष--77 (सपा के एक विधायक ने वोट नहीं डाला)
ये रहा यूपी से मिले वोटों का परिणाम
निरस्त--दो वोट
रामनाथ कोविंद--335
मीरा कुमार--65