फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AMU वीसी के फरमान पर बवाल, दी सफाई!

Tue, 11 Nov 2014 09:10 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति ले. जनरल जमीर उद्दीन शाह ने छात्राओं को लाइब्रेरी के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देने को लेकर मंगलवार को सफाई दी। उन्होंने कहा- मौलाना आजाद लाइब्रेरी में जगह कम है इसलिए स्नातक की छात्राओं को इसके इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी।
विज्ञापन


मेरे इस कदम को महिला विरोधी तरीके से पेश किया गया। जबकि स्नातक को छोड़कर बाकी सभी पाठ्यक्रमों की करीब पांच हजार छात्राएं इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल कर रही हैं।

अलीगढ़ के अब्दुल्ला वीमेंस कॉलेज की छात्राओं ने सोमवार को एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी इस्तेमाल करने की इजाजत कुलपति से मांगी थी, लेकिन उन्होंने इन्कार दिया था। इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया।
विज्ञापन


लखनऊ में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में ले. जनरल जमीर उद्दीन शाह ने कहा-परास्नातक, रिसर्च, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित अन्य पाठ्यक्रमों की पांच हजार लड़कियां पहले से मौलाना आजाद लाइब्रेरी का इस्तेमाल कर रही हैं।

लड़के जानते हैं अपनी तहजीब

कुलपति ने कहा कि जहां तक एएमयू के लड़कों की बात है तो वे अपनी तहजीब जानते हैं। रोक केवल वीमेंस कॉलेज की छात्राओं के लिए है। इस कॉलेज में पांच हजार छात्राएं पढ़ती हैं। यह कैम्पस एएमयू से तीन किलोमीटर दूर है। यहां की अलग लाइब्रेरी है।

इसके अलावा मौलाना आजाद लाइब्रेरी से जो भी किताबें चाहिए होती हैं इसके लिए इन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होता है। अगले दिन वह किताब छात्रा को मिल जाती है।

उन्होंने कहा कि एएमयू पूरी तरह से सेक्युलर यूनिवर्सिटी है लेकिन इसे बदनाम करने की साजिश की जा रही है। हम लोग छात्राओं को बराबरी का दर्जा देते हैं। छात्र-छात्राओं में कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। दोनों को एक समान सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।

पहले दिया था ये फरमान

इसके पहले कुलपति ने अपने बयान में कहा गया था कि एएमयू की सेंट्रल लाइब्रेरी में लड़कियों को जाने की इजाजत नहीं दी सकती। इससे लड़कों का ध्यान बंटता है।

वुमेंस कॉलेज की स्टूडेंट्स ने ये मांग की थी कि उन्हें सेंट्रल लाइब्रेरी में पढ़ने की इजाजत दी जाए। इस मामले में लंबे वक्त से बातचीत चल रही थी। वीसी ने ये कहते हुए उनकी ये मांग खारिज कर दी कि लड़कियों के आने से चार गुना ज्यादा लड़के लाइब्रेरी पहुंचेंगे।

हालांकि वीसी की तरफ सफाई दी गई है कि सेंट्रल लाइब्रेरी में जगह की काफी कमी है। मुद्दा अनुशासन नहीं बल्कि जगह है।
विज्ञापन

‘कोशिश करेंगे गर्ल्स स्टूडेंट को न हो दिक्कत’

कुलपति के इस बयान से स्टूडेंट्स में काफी रोष है। उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि वहां इतने लड़के आते हैं कि जगह की कमी हो जाए। कम से कम हमें वहां से बुक इश्यू करवाने की इजाजत तो मिलनी चाहिए।

वहीं यूनीवर्सिटी की एक और स्टूडेंट का कहना है कि लड़के-लड़कियां बराबर हैं, फिर हमसे हमारा हक क्यों छीना जा रहा है।

उधर वीसी के पीआरओ डॉ. राहत अबरार का कहना है कि वुमेंस कॉलेज में एक समारोह के दौरान सोमवार को ये मुद्दा उठा था। वीसी ने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। उन्होंने कहा था कि लाइब्रेरी में स्पेस न होने की वजह से दिक्कत होगी।

हम कोशिश कर रहे हैं कि गर्ल्स स्टूडेंट की पढ़ाई प्रभावित न हो। पीजी, रिसर्च वगैरह की करीब 10 हजार गर्ल्स स्टूडेंट हैं। जिनके लिए अलग से बुक बैंक है। अगर उन्हें कोई बुक मिलने में दिक्कत आ रही है तो वे लाइब्रेरियन को बता सकती हैं, 24 घंटे के अंदर वो बुक उनकी लाइब्रेरी में उपलब्ध करा दी जाएगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें