टीकाकरण के जरिये शिशुओं को छह जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘पांच साल सात बार’ का नया मंत्र दिया है। इसमें पांच साल की उम्र तक बच्चों को सात बार टीकाकरण कराके बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस मंत्र के प्रचार-प्रसार के लिए मंत्रालय ने अभिनेता अमिताभ बच्चन को जिम्मेदारी दी है ताकि हर माता-पिता तक टीकाकरण का संदेश पहुंचाया जा सके।
अमर उजाला, यूनिसेफ व थॉमसन रायटर्स के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली में आयोजित क्रिटिकल एप्रेजल स्किल्स वर्कशॉप में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. भृगु कपूरिया ने बताया कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। इसमें 3.7 करोड़ बच्चे और 3 करोड़ गर्भवती माताएं शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण के लगभग 90 लाख सत्र चलाता है। इसके बावजूद संपूर्ण टीकाकरण का औसत मात्र 65 फीसदी का लक्ष्य छू पाया है। लगभग 35 से 38 फीसदी बच्चे संपूर्ण टीकाकरण से छूट रहे हैं। इस लक्ष्य को 90 फीसदी तक पहुंचाने के लिए मिशन इंद्रधनुष अभियान शुरू किया गया है। इसमें छूटे हुए बच्चों के टीकाकरण का प्रयास चल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘पांच साल सात बार, छूटे न टीका अबकी बार’ के नारे से माता-पिता को जागरूक करने की कोशिश हो रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि वे अपने बच्चों को टीका जरूर लगवाएं। इसमें एएनएम, आशा, आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी लगाया गया है।
डॉ. कपूरिया ने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम में बदलाव करते हुए कई नए टीकेजोड़े गए हैं। चरणबद्ध तरीके से राज्यों में इसकी शुरुआत की जा रही है। रोटा वायरस वैक्सीन को उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा, असम व राजस्थान में लॉन्च किया गया। जुलाई में इसे उत्तर प्रदेश में शुरू करने की संभावना है।
इसके अलावा न्यूमोकॉकल कांजुगेंट वैक्सीन (पीसीवी) को हिमाचल, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उप्र के 12 चुने हुए जिलों में लॉन्च किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत में 2011 में पोलियो का खात्मा हो गया था। लगातार तीन साल कोई केस सामने न आने पर 2014 में पोलियो फ्री घोषित किया गया था। इसके बाद 2016 में हमें टिटनेस फ्री होने की उपलब्धि मिली है।