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अब अमिताभ बच्चन कहेंगे ‘पांच साल सात बार, छूटे न टीका अबकी बार’

Fri, 29 Jun 2018 10:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अमिताभ बच्चन
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टीकाकरण के जरिये शिशुओं को छह जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘पांच साल सात बार’ का नया मंत्र दिया है। इसमें पांच साल की उम्र तक बच्चों को सात बार टीकाकरण कराके बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस मंत्र के प्रचार-प्रसार के लिए मंत्रालय ने अभिनेता अमिताभ बच्चन को जिम्मेदारी दी है ताकि हर माता-पिता तक  टीकाकरण का संदेश पहुंचाया जा सके।
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अमर उजाला, यूनिसेफ व थॉमसन रायटर्स के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली में आयोजित क्रिटिकल एप्रेजल स्किल्स वर्कशॉप में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. भृगु कपूरिया ने बताया कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। इसमें 3.7 करोड़ बच्चे और 3 करोड़ गर्भवती माताएं शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण के लगभग 90 लाख सत्र चलाता है। इसके बावजूद संपूर्ण टीकाकरण का औसत मात्र 65 फीसदी का लक्ष्य छू पाया है। लगभग 35 से 38 फीसदी बच्चे संपूर्ण टीकाकरण से छूट रहे हैं। इस लक्ष्य को 90 फीसदी तक पहुंचाने के लिए मिशन इंद्रधनुष अभियान शुरू किया गया है। इसमें छूटे हुए बच्चों के टीकाकरण का प्रयास चल रहा है।
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उन्होंने कहा, ‘पांच साल सात बार, छूटे न टीका अबकी बार’ के नारे से माता-पिता को जागरूक करने की कोशिश हो रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि वे अपने बच्चों को टीका जरूर लगवाएं। इसमें एएनएम, आशा, आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी लगाया गया है।

डॉ. कपूरिया ने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम में बदलाव करते हुए कई नए टीकेजोड़े गए हैं। चरणबद्ध तरीके से राज्यों में इसकी शुरुआत की जा रही है। रोटा वायरस वैक्सीन को उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा, असम व राजस्थान में लॉन्च किया गया। जुलाई में इसे उत्तर प्रदेश में शुरू करने की संभावना है।

इसके अलावा न्यूमोकॉकल कांजुगेंट वैक्सीन (पीसीवी) को हिमाचल, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उप्र के 12 चुने हुए जिलों में लॉन्च किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत में 2011 में पोलियो का खात्मा हो गया था। लगातार तीन साल कोई केस सामने न आने पर 2014 में पोलियो फ्री घोषित किया गया था। इसके बाद 2016 में हमें टिटनेस फ्री होने की उपलब्धि मिली है।

छह जानलेवा बीमारियों से बचाता है टीकाकरण

- फोटो : डेमो
नवजात बच्चों का नियमित टीकाकरण कराने से उनका छह जानलेवा बीमारियों से बचाव होता है। इसमें पोलियो, टिटनेस, डिप्थीरिया (गला घोंटू), खसरा, परटुसिस (काली खांसी) और टीबी मुख्य हैं। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी को भी नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है।

ये हैं जरूरी टीके
जन्म होते ही - ओरल पोलियो, हेपेटाइटिस बी, बीसीजी
डेढ़ महीने बाद - ओरल पोलियो-1,  पेंटावेलेंट-1, एफआईपीवी-1, पीसीवी-1, रोटा-1
ढाई महीने बाद - ओरल पोलियो-2, पेंटावेलेंट-2, रोटा-2
साढ़े तीन महीने बाद - ओरल पोलियो-3, पेंटावेलेंट-3, एफआईपीवी-2, रोटा-3, पीसीवी-2
नौ से 12 माह में - मीजल्स 1, मीजल्स रुबेला 1, जेई 1, पीसीवी-बूस्टर, विटामिन ए
16 से 24 माह में - मीजल्स 2, मीजल्स रुबेला 2, जेई 2, बूस्टर डीपीटी, पोलियो बूस्टर, जेई 2
 
ये भी हैं जरूरी
5 से 6 साल में - डीपीटी बूस्टर 2
10 साल में - टिटनेस
15 साल में - टिटनेस
गर्भवती महिला को - टिटनेस 1 या टिटनेस बूस्टर
(नोट : पीसीवी, रोटा वायरस, मीजल्स रुबेला वैक्सीन की चरणबद्ध शुरुआत हो रही है।)
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पेंटावेलेंट वैक्सीन से कम हुआ मासूमों का दर्द

- फोटो : डेमो
पेंटा यानी पांच वैक्सीन का मिश्रित रूप। यह शिशुओं को पांच जानलेवा बीमारियों हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी (एक जीवाणु जो मेनिनजाइटिस, निमोनिया और ओटाइटिस जैसी बीमारी का कारक होता है), कुकुर खांसी (हूपिंग कफ), टिटनेस, हेपेटाइटिस-बी और डिप्थीरिया से बचाता है। अभी तक शिशुओं को गलाघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस-बी और हिब से बचाने के लिए तीन बार में कुल नौ सुइयां लगती रही हैं। आईपीवी शुरू हो जाने से इसकी संख्या 10 हो गई। लेकिन अब 6, 10 और 14 सप्ताह में शिशु को केवल पेंटावेलेंट टीका लगेगा। यानी सुइयों की संख्या नौ से घटकर तीन हो गई है। आईपीवी को लेकर कुल सुइयों की संख्या चार होगी।

बुखार हो तो घबराएं नहीं
पेंटावेलेंट टीका बच्चे की बाईं जांघ पर लगता है। इसमें सुई लगने वाले स्थान पर लाली, सूजन और दर्द की शिकायत हो सकती है। ये लक्षण आम तौर पर सुई लगाने के अगले दिन दिखते हैं और एक से तीन दिन तक रहते हैं। टीकाकरण के बाद बच्चे को कुछ समय तक बुखार भी आ सकता है। यह लक्षण आम तौर पर नियमित टीकाकरण के दौरान भी होते हैं लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है।
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