दरअसल गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में मिली पराजय तथा सपा व बसपा के बीच तय हो चुके गठबंधन ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कुछ तात्कालिक घटनाओं और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों को लेकर कई संगठनों ने जिस तरह दलितों को भाजपा से दूर करने की कोशिश की, उससे भी रणनीतिकारों की चिंता बढ़ी हुई है।
उन्हें लग रहा है कि जातीय समीकरण दुरुस्त करके वोटों का गणित ठीक न किया गया तो नुकसान हो सकता है। भगवा टोली किसी भी कीमत पर यूपी को सहेजकर अपने साथ रखना चाहती है ताकि मिशन 2019 में सफलता मिलने में कोई संदेह न रहे।
लोकसभा चुनाव की चुनौतियों को देखते हुए ही पिछले वर्ष शाह ने मिशन यादव-जाटव जोड़ो अभियान शुरू कराया था। अब ग्राम स्वराज अभियान के जरिये उसे आगे बढ़ाया जा रहा है।