वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार किसी भी नाबालिग को पूछताछ के लिए थाने ले जाने की स्थिति में उसके अभिभावक की मौजूदगी अनिवार्य है। कानून में स्पष्ट कहा गया है कि शांतिभंग जैसे मामलों में नाबालिगों का चालान नहीं किया जा सकता। वहीं, परिवारीजन ने बताया कि पुलिस बिना उन्हें सूचना दिए किशोरों को ले गई। जब उन्होंने जानकारी के लिए थाने जाना चाहा तो उन्हें बाहर ही रोक दिया गया।
पहले भी विवादों में रही कोतवाली
मुसाफिरखाना कोतवाली पूर्व में भी विवादों में घिर चुकी है। हाल ही में इसी थाने के एक उपनिरीक्षक का आडियो ‘पंडित जी को बुक करना है’ खूब वायरल हुआ था, जिसमें रिश्वतखोरी का संकेत मिलने पर पुलिस की छवि पर सवाल उठे थे। अब किशोरों के साथ बर्बरता की घटना ने विभाग की छवि को और नुकसान पहुंचाया है।
एएसपी से कराई जा रही जांच
प्राथमिक जांच के आधार पर सिपाही संतोष कनौजिया और अर्धेन्दु चौहान को निलंबित किया गया है। जांच एएसपी को सौंपी गई है। जो भी दोषी होगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।-अपर्णा रजत कौशिक, पुलिस अधीक्षक