आदेशों के पालन को लेकर फर्जी हलफनामा दाखिल किए जाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नाराजगी जताते हुए अमेठी के जिलाधिकारी प्रशांत शर्मा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। इसके बाद हाजिर हुए जिलाधिकारी को हाईकोर्ट ने अदालत के उठने तक हिरासत में ले लिया। जिलाधिकारी को कोर्ट में स्पष्टीकरण दाखिल करना पड़ा।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने डॉ. राम प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को अमेठी के जिलाधिकारी प्रशांत शर्मा के हाजिर न होने और उनकी तरफ से कोर्ट के आदेशों के अनुरूप हलफनामा न दाखिल किए जाने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
वादी के अधिवक्ता राजेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अमेठी के एक ग्राम प्रधान के खिलाफ शिकायत पर कोर्ट ने 11 जनवरी 2019 व सात फरवरी 2019 को जिलाधिकारी को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इस पर जिलाधिकारी की तरफ से कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया कि अदालत के आदेशों के पहले ही वह संबंधित विषय पर कार्यवाही कर चुके हैं।
अधिवक्ता ने बताया कि जिलाधिकारी की ओर से दाखिल हलफनामे में गलत जानकारी दी गई थी, जिसे वे अदालत के संज्ञान में ला चुके हैं। इस मामले में कोर्ट ने 22 अक्तूबर 2019 को आदेश दिया था कि अमेठी के जिलाधिकारी या तो बेहतर हलफनामा दाखिल करें अथवा सुनवाई की अगली तिथि 4 नवंबर 2019 को कोर्ट में हाजिर हों।