कुलपति ने कहा कि प्रवेश को लेकर अवध विश्वविद्यालय ने आनलॉइन प्रक्रिया बहुत पहले शुरू की थी। जब कोरोना अपने चरम पर था तब हमारी आनलाइन प्रवेश प्रक्रिया तेजी से चल रही थी। प्रवेश के लिए पहली बार विवि परिसर के कोर्सों में रिकार्ड 5500 से अधिक आवेदन आए हैं। अब समस्या महाविद्यालयों में प्रवेश को लेकर है।
दूसरे चरण में हमने महाविद्यालयों को भी एक ग्रुप बनाकर जोड़ा है। उनके साथ डेढ़ महीने से बातचीत चल रही है। निर्देश दिए जा रहे हैं कि सभी महाविद्यालय ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया अपनाएं। ऑफलाइन प्रवेश में तमाम विघ्न बाधाएं आएंगी।
ऑनलाइन प्रवेश व क्लासेज ही शैक्षिक सत्र के लिए अंतिम विकल्प
कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि प्रत्येक 100 व्यक्ति में दो व्यक्ति कोरोना संक्रमित आ रहा है। इस तरह सौ विद्यार्थियों में दो अगर संक्रमित आ गए तो परीक्षा केंद्र भी बंद हो जाएगा और महाविद्यालय में भी ताला लग जाएगा। इसलिए ऑनलाइन करने की प्रक्रिया ही एकेडमिक सेशन के लिए अंतिम विकल्प है। महाविद्यालयों के साथ बैठक में यह भी तय हो रहा है कि प्रवेश प्रक्रिया केंद्रीयकृत कर दी जाए। यदि 15 दिन में स्थितियां नहीं सुधरी तो एक प्लेटफार्म पर एडमिशन के इंतजाम किए जाएंगें। इसी के साथ सबको नियमित ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था होगी। कुलपति ने बताया कि जिन विषयों के सत्र बहुत महत्वपूर्ण होने वालें हैं, उसे हम आनलाइन क्लास के जरिए सबसे पहले वरीयता देगें। अभी तीन महीने तक नहीं लग रहा है कि बच्चों को कालेज में बुलाकर पढ़ाई शुरू हो पाएगी। ऐसे में अक्तूबर के आस-पास ही हम प्रेक्टिकल क्लासेज के बारे में सोच सकते हैं।
कहा कि सभी कालेजों और फैकेल्टियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि फिफ्टी-फिफ्टी मोड पर काम करें। पचास फीसदी इंटरनेट मोड पर ई-कंटेट डिलीवर करें और पचास प्रतिशत के लिए हम स्थिति के नार्मल होने का इंतजार करेगें। फिर भी अक्तूबर तक हालात ऐसे ही रहे तो बच्चों को छोटे-छोटे समूह में बुलाकर प्रेक्टिकल क्लासेज शुरू कराएंगें। उनकी समस्याओं का समाधान कराएंगें। इन क्लासेज को रिकार्ड करके वेबसाईट पर भी डालने के इंतजाम होगें, ताकि बार-बार इसे देखकर परिपक्व हो सकें। जो क्लास नहीं कर पाएंगें उनके लिए यह लेक्चर उपयोगी होगा। ई-सुविधा के साथ डाउनलोड करके एक ही प्लेटफार्म पर सभी महाविद्यालयों के छात्र कोरोना से बचते हुए पढ़ाई को आगे बढ़ाएंगें। यह व्यवस्था हमने अगले सत्र के लिए तैयार कर ली है।
कुलपति ने बताया कि तीसरा चरण अगले वर्ष की परीक्षाओं की योजना तैयार करने का आता है। ऑनलाइन के मोड को हाईब्रिड से जोड़कर कुछ परीक्षाएं आनलाइन और कुछ आफलाइन कराने के इंतजाम करने पड़ेगें।इस व्यवस्था के लिए थोड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। इसकी लार्ज स्केल पर करने की व्यवस्था की तैयारी अवध विश्वविद्यालय ने शुरू कर दी है। इसके जरिए अगले वर्ष पचास फीसदी समस्याएं कम हो जाएंगी। छोटी-छोटी परीक्षाएं आनलाइन मोड से संपन्न करा ली जाएगी। बड़े एक्जाम को ही जैसे बीए, बीएससी को ही हम आफलाइन मोड पर करीब 450 सेंटर के जरिए कराने की चुनौती से जूझेंगे। फिजीकल और कंवेंशन मोड पर सारी की सारी परीक्षाएं कराना संभव नहीं होगा।
इस समय परीक्षाओं को नार्मल तरीके से कराना कोविड के खतरे को देखते हुए संभव नहीं होगा। इसको लेकर एक दो दिन मेें समाधान आने वाला है आगे की संस्तुति हाईब्रिड कीहोगी इसके लिए तैयार रहना पड़ेगा। कुलपति ने कहा कि महाविद्यालयों के बच्चों को क्लास को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है अवध विश्वविद्यालय अपने कैंपस में सभी विषयों की ई-कक्षाएं चलाने की तैयारी कर रहा है। इसके जरिए महाविद्यालयों के बच्चे एजुकेट होंगें और परीक्षा में भाग लेने के लिए अर्ह होगें। सबको सुलभ करने के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम के कई प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश होगी कि वर्तमान सत्र और अगला सत्र दोनों सही समय पर संपन्न हो।
नए कुलपति को टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ना होगा
कुलपति ने कहा कि मेरे पीरियड की सबसे बड़ी घटना तो कोरोना ही है। मेरा कार्यकाल अब समाप्त हो रहा है। आने वाले कुलपति के लिए यही संदेश है कि अपने पैरों पर खड़े होना है। टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ना होगा। ज्ञान की अपनी जो पिपासा है उसे मिटाने के लिए कंवेंशन से आगे बढ़कर काम करना होगा। विश्वविद्यालय के बच्चों में अद्भुत क्षमता है, अब वो विश्वास के साथ अपने पैरों पर खड़े हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। इसे बनाए रखना होगा। बच्चो को शुभकामना देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय व अपने महाविद्यालय का नाम करें।