78 वर्षों की विश्वसनीय पत्रकारिता के साथ स्वर्णिम शताब्दी की ओर बढ़ रहा अमर उजाला समूह राजधानी के होटल द सेंट्रम में 'अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026' का आयोजन करने जा रहा है। 18 और 19 मई को होने जा रहे इस कार्यक्रम में मंच पर सत्ता पक्ष होगा तो विपक्ष की आवाज भी होगी। फिल्मों की चमक होगी तो जमीन से जुड़ी राजनीति का अनुभव अनुभव भी। यही इस संवाद की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां से निकले विचारों से देश को एक नई दिशा और नया दृष्टिकोण मिलेगा। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शामिल होंगे। उप-मुख्यमंत्री प्रदेश के विकास समेत, देश-प्रदेश के मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।
तो आइए हम यहां उनके बारे में जान लेते हैं...
उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर संघर्षों भरा रहा। साधारण परिवार में जन्में केशव प्रसाद मौर्य ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ने के बाद खुद ही अपनी राजनैतिक पहचान बनाई। विहिप नेता अशोक सिंघल के करीबी कहे जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य वर्ष 2013 में प्रयागराज के केपी कॉलेज में आए ईसाई धर्म प्रचारक का विरोध करने को लेकर चर्चा में आए थे। इसके बाद केशव को भाजपा ने राजनीति में उतारा। उन्हें दूसरी योगी आदित्यनाथ की सरकार में डिप्टी सीएम के रूप में दूसरा कार्यकाल दिया गया है।
सिराथू में हुआ डिप्टी सीएम का जन्म
7 मई 1969 को सिराथू में जन्में केशव प्रसाद मौर्य अपने शुरुआती दिनों में साइकिल से अखबार बांटा करते थे। उनके पिता स्व. श्यामलाल की सिराथू तहसील के पास छोटी सी चाय की दुकान हुआ करती थी। अखबार बांटने के बाद जो भी समय बचता वह अपने पिता के साथ चाय की दुकान में हाथ बटाया करते थे। किशोर अवस्था में ही वह संघ से जुड़ गए और शाखा लगाने लगे। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा की यह लड़का एक दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति का सितारा बनेगा।
18 साल तक संघ के प्रचारक रहे
18 साल तक केशव प्रसाद संघ के प्रचारक रहे। विहिप नेता अशोक सिंघल का सानिध्य मिलने के बाद उन्होंने रामजन्म भूमि व गोरक्षा आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कट्टर हिंदूवादी छवि के कारण भाजपा ने पहली बार वर्ष 2002 में प्रयागराज शहर पश्चिमी से माफिया अतीक के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में केशव प्रसाद हार गए। वर्ष 2007 में भाजपा ने फिर केशव को शहर पश्चिमी से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2012 में जीते विधानसभा चुनाव
वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने फिर से केशव को उनके गृह नगर सिराथू से प्रत्याशी बनाया और वह भारी मतों से जीतकर विधायक बने। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में केशव को भाजपा ने फूलपुर संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया। इसमें केशव करीब तीन लाख मतों से सपा प्रत्याशी धर्मराज सिंह पटेल से चुनाव जीते। वर्ष 2016 में केशव को भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा।
चुनाव हारे, पर बने डिप्टी सीएम
केशव ने भाजपा के पक्ष में हवा बनाने के लिए पूरे प्रदेश में ताबड़तोड रैलियां कीं। जिसका नतीजा रहा कि 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती और प्रदेश में सरकार बनाई। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने केशव की मेहनत का फल देते हुए उन्हें डिप्टी सीएम का दायित्व सौंपा। इस बार विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य को उन्हीं के गृहनगर सिराथू विधानसभा से प्रत्याशी बनाया, लेकिन वह सपा प्रत्याशी डॉ. पल्लवी पटेल से चुनाव हार गए।
केशव तो चुनाव हारे, लेकिन प्रदेश में भाजपा ने दोबारा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने की कामयाबी हासिल की। इसी का नतीजा रहा कि केशव भले ही चुनाव हारे, लेकिन प्रदेश में फिर से भाजपा की सत्ता बनाने में उनकी अहम भूमिका है। पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने चुनाव हारने के बाद भी केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाया।