"78 वर्षों की शानदार यात्रा के लिए अमर उजाला को बधाई"
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
'अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026' में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 78 वर्षों की शानदार यात्रा के लिए अमर उजाला को बधाई दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अमर उजाला ने वर्तमान की चुनौतियों के साथ अपने आप को तैयार किया है। सीएम योगी ने कहा कि ट्रेड यूनियन की प्रवृत्ति कभी सकारात्मक नहीं रही। जहां पर भी ये प्रवृत्ति पनपी है, वहां पर उसने सत्यानाश ही किया है, किसी का कल्याण नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि आप देखते होंगे, ये ट्रेड यूनियन के नेता कोई काम नहीं करते। एक झोला कंधे पर लटकाकर घूम-घूम हर एक व्यक्ति से चंदा वसूली करके अपने घर को तो भरते हैं, लेकिन उस श्रमिक, कामगार को, उस सिस्टम से जुड़े लाखों लोगों को एक समय पर भूखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर देते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि कानपुर आपके सामने उदाहरण है, कभी कानपुर देश के अंदर एक समृद्ध शहरों में से एक था। हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बना था। वहां सारे उद्योग बंद हो गए थे। वहां पर जो लोग पहले सिर तानकर जाते थे, अपने घर से अपना टिफिन लेकर जाते थे। उद्योग में काम करते थे और फिर उसी गौरव और गरिमा के साथ वापस आते थे। उद्योग बंद हो गए। जो व्यक्ति गौरव के साथ जाता था, आज वहां पर ठेला लगाने के लिए मजबूर है। क्योंकि ट्रेन यूनियन की प्रवृत्ति ने वहां के उद्योगों को नष्ट कर डाला। पूरी तरह बर्बाद कर डाला। उद्योपति तो दूसरी जगह चला गया। दूसरी जगह उद्योग लगा दिया, लेकिन वहां काम करने वाला श्रमिक ट्रेड यूनिन का शिकार बन गया। ट्रेड यूनिन का शिकार बना श्रमिक भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है।
सीएम योगी ने कहा कि गलत रिपोर्टिंग हमेशा सिस्टम को दुर्गति की ओर लेकर जाता है। नकारात्मक रिपोर्टिंग हमेशा दुर्गति का शिकार बनाती है। गति को दुर्गति की ओर लेकर जाता है। सकारात्मक रिपोर्टिंग उसी प्रकार से उस पूरे सिस्टम को प्रकृति और समृद्धि के नए सोपान की ओर लेकर जाता है। जिस सकारात्मक भाव के साथ आज से नौ साल पहले हमने प्रदेश के अंदर कार्य करना शुरू किया। आज उत्तर प्रदेश की प्रगति आप सबके सामने, देश के सामने, दुनिया के सामने देखने को मिल रही है।
सीएम योगी ने कहा कि आज से नौ वर्ष पहले जब हमने शासन की बागडोर संभाली। उस समय हमारे सामने चुनौतियां थीं। मैं यूपी की समस्या को जानता था। मैं जानता था यूपी में हर दूसरे दिन दंगे होते थे। मैं जानता था यहां पर हर जिले में सत्ता का समांतर एक माफिया सत्ता संचालित होती है, उसी के इशारे पर वहां का पूरा सिस्टम कार्य करता है।
''यूपी में पहले इंफ्रास्ट्रचर नहीं था''
सीएम योगी ने कहा कि यूपी में पहले इंफ्रास्ट्रचर नहीं था, देश के अंदर कहीं से भी आएंगे तो उत्तर प्रदेश की सीमा का अंदाजा लग जाता था जहां सड़कों पर गड्ढे दिखाई दें और चलना थोड़ा कठिन हो जाए, सांय काल है तो अंधेरा प्रारंभ हो जाए तो मानकर चलिए उत्तर प्रदेश के बोर्डर पर आप आ गए। प्रदेश का खजाना खाली, कोई बैंकर्स हमें पैसा देने के लिए तैयार नहीं। कर्ज लेने की भी एक सीमा होती है। रिजर्व बैंक ने एक सीमा तैयार कर रखी है।
सीएम योगी ने कहा कि पूरे प्रदेश की जितनी भी आबादी है, वो हमारे परिवार का हिस्सा है। समग्र विकास के लक्ष्य को कार्य करना है। सीएम योगी ने कहा कि हमने एक आधार तैयार किया है, कनेक्टिविटी का। रोड की कनेक्टिविटी सबसे अच्छी। रेलवे का सबसे अच्छा नेटवर्क आज यूपी में है।
सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले यूपी में मात्र दो एयरपोर्ट संचालित थे। एक लखनऊ और वाराणसी का। गोरखपुर और आगरा आंशिक रूप से संचालित थे। आज 16 एयरपोर्ट संचालित हो रहे हैं। पांच पर हम और कार्य कर रहे हैं। पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। भारत का सबसे पड़ा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यूपी ने बना दिया है। 15 जून से डोमेस्टिक सेवा शुरू करने जा रहे हैं।
सत्र अनुशासन , आकांक्षाएं और संकल्प
सीएम योगी की सादगी पर बोले स्वामी चिदानंद
- फोटो : Amar Ujala Graphics
सत्र अनुशासन, आकांक्षाएं और संकल्प में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने वंदना से शुरुआत की। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी अपनी बात रख रहे हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा मुझे लगता है प्रभु के द्वारा सभी को चुन लिया गया है। हम सब चुने गए हैं। हर एक को अपना-अपना रोल प्ले करना है। गोल सेट करना है और रोल प्ले करना है।
बातचीते के दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि, सारा जीवन दैवीय आज्ञा पर होता है। प्रभु ने हमें चुन लिया है। सभी को अपनी-अपनी भूमिका निभानी है। परमार्थ का अर्थ ही यह है कि दूसरों के लिए जीवन। बचपन से मौन की साधना की। ध्यान की साधना की। फिर हम हिमालय पर गए। आज पूरे विश्व को जिस समाधान की आवश्यकता है, चुनौतियों से निजात पाने के लिए जो उत्तर चाहिए, वो हिमालय की शांति ने दिए।
व्यस्त रहते हुए मस्त और स्वस्थ कैसे रहें, यह उसी से मिले जीवन का प्रभाव है। जीवन में संवाद का क्या प्रभाव होता है, इसके सूत्र हिमालय से मिले। आज प्रसन्नता है कि अमर उजाला ने सभी संस्थाओं के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का नाम संवाद रखा है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि संवाद ही समाधान। संवाद से ही आज या कभी सारी दीवारें गिरती हैं, संवाद से ही सारी दरारें भरती हैं। संवाद से ही दिल से दिल जुड़ते हैं। चाहे वो परिवार में हो, समाज में हों, राष्ट्र में हो या विश्व में हों। आज को क्राइसिस देखते हैं, उन क्राइसिस का एक ही कारण है संवाद का अभाव। डायलॉग इज लाइक एक डायलिसिस।
'सोच बड़ी है तो समस्या भी समाधान बन जाता है'
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि सबसे पहले बात है अनुशासन, अनुशासन का मतलब है निज पर शासन फिर अनुशासन। सारी समस्याएं खुद से ही खड़ी होती हैं। मेरी सोच छोटी है तो समधान भी समस्या बन जाता है। सोच बड़ी है तो समस्या भी समाधान बन जाता है। उन्होंने कहा कि आदरणीय अटल जी कहते थे छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता है और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता है। इसलिए सारा संकट सोच का है। पूरे समाज में देखिए इस सोच के संकट से उबार पाने के लिए सबसे पहले अनुशासन।
गौर गोपाल दास बोले- यह मेरा चौथा संवाद है
- फोटो : अमर उजाला
मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने शुप्रभात लखनऊ से कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं अमर उजाला का हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहता हूं। यह मेरा चौथा संवाद है।
'जीवन में आप कुछ भी करें, कोई तो नाराज जरूर होगा'
गौर गोपाल दास ने कहा कि जीवन में आप कुछ भी करें, कोई तो नाराज जरूर होगा। सबको खुश करना असंभव के बराबर है। कुछ भी करिए लोग कुछ तो कहेंगे।
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...
डूबना अच्छा होता है, डूबते-डूबते टूटना अच्छा नहीं होता। दूसरों के लिए जीना अच्छा है, लेकिन खुद के लिए जीना न भूलें। हमें किसी की जरूरत नहीं, इसे अहम कहते हैं। सभी को हमारी जरूरत है, इसे वहम कहते हैं।
'सफलता अकेली होती है'
गौर गोपाल दास ने कहा कि जीवन में आप कुछ भी करें, कोई तो नाराज जरूर होगा। सबको खुश करना असंभव के बराबर है। कुछ भी करिए लोग कुछ तो कहेंगे। जिंदगी के रिश्तों में पता करें कि कौन सामने है, कौन साथ में है? सफलता अकेली होती है। जीवन में ऊपर जाने पर नंबर, उपलब्धियां, शोहरत-दौलत होती है, लेकिन नीचे उतरने पर रिश्ते पता चलते हैं। उनमें सुकून होता है, सच्चाई होती है।
जिंदगी के रिश्तों में पता करें कि कौन सामने है, कौन साथ में है? सफलता अकेली होती है। जीवन में ऊपर जाने पर नंबर, उपलब्धियां, शोहरत-दौलत होती है, लेकिन नीचे उतरने पर रिश्ते पता चलते हैं। उनमें सुकून होता है, सच्चाई होती है।
'आपको खाना-पीना छोड़ने की जरूरत नहीं'
गौर पाल दास ने कहा कि उपवास करने के लिए आपको खाना-पीना छोड़ने की जरूरत नहीं है। एक दिन बिना स्मार्ट फोन के, बिना इंस्टाग्राम के, बिना व्हाट्सएप के, बिना चैट जीपीटी के, बिना ट्विटर, लिंक्डइन के एक दिन उपवाल करके दिखाइए। भगवान खुद नीचे उतरकर आएगा। बस कर पहले रुलाएगा क्या?
गौर गोपाल दास ने बताया, हर समस्या का समाधान
गौर गोपाल दास ने मंच से पूछा कि क्या आपको कोई चिंता है, किसी समस्या से परेशान है? उन्होंने बताया कि हर कोई ही परेशान है। कोई अपने पति या पत्नी से परेशान है। हैप्पी मैरेड लाइफ चाहते हैं। कोई अपने करियर में समस्या से जूझ रहे हैं। इन सब से उबरने का क्या तरीका है? इसका एक आसान तरीका है कि अपनी जिन्दगी की परेशानी को सामने रखें, पति-पत्नी को एक दूसरे से दिक्कत है तो अपने फ़ोन के वॉलपेपर पर साथी कि फोटो अपलोड कर लें। इसे पूरा दिन देखें। प्रॉब्लम सोल्व नहीं, उसका सामना करना सीखें।
सत्र 'जुनून और जिंदगी' में लोकप्रिय अभिनेता जैकी श्रॉफ ने की दिल की बात
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
सत्र 'जुनून और जिंदगी' में लोकप्रिय अभिनेता जैकी श्रॉफ और फिल्म के निर्देशक मनीष सैनी अपनी बात रख रहे हैं। इन दिनों वे अपनी आगामी फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' को लेकर चर्चा में हैं।
जैकी श्रॉफ ने कहा कि आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद। बात करना ज्यादा आता नहीं। काम करता हूं। उत्तर प्रदेश की तरक्की के बारे में जानकर अच्छा लगा। यह जो राज्य है वह श्रीराम का जन्मस्थान है। तो बात यहीं खत्म। इतने बड़े बादशाह लोग संभाल रहे तो फिर फिक्र किस बात की है।
आप दादा जी के रोल में हैं अपनी आगामी फिल्म में, कितना वक्त लगा किरदार के लिए?
मेरे हाथ की दोनों मसल फटी हुई हैं। इधर की हड्डी भी टूटी हुई है। यह काम दिखता मजे का है। लेकिन, मेहनत बहुत है। मेरा नसीब है कि किसी नेशनल विनर डायरेक्टर के साथ काम कर रहा हूं।
आपको जग्गू दादा भी कहा जाता है प्यार से। इसके पीछे एक पर्सनल स्टोरी है। बताइए?
जवाब: मेरा नाम जयकिशन है। मेरा बड़ा भाई जयहमंत था। मेरी बेटी कृष्णा है। मेरी मां मुझे प्यार से जग्गू बोलती थी। बड़ा हुआ तो दोस्तों के लिए मार खानी पड़ती थी तो जग्गू दादा हो गया। जैकी नाम स्कूल में पड़ गया। ये कहानी है मेरे नाम की। नाम में क्या रखा है। दिल देखिए।
आपके पास एक गमला हमेशा रहता है। इसकी क्या कहानी है? आप पौधे को गले में धारण कर लेते हैं।
जैकी श्रॉफ: जब यूपी के बांदा में तापमान 47 तक चला जाता है तो लगाओ पौधे। पर्यावरण खराब है तो यही काम आए। हम सबको यही सोचकर चलना पड़ेगा कि हरियाली होगी तो ठंडक होगी। दबाकर पौधे लगाओ। मैं तो चाहता हूं कि यूपी जैसे विशाल प्रदेश में पौधे दबाकर लगाओ। स्कूल में बच्चों को बताओ। ये सोचो कि हम बच्चों के लिए क्या छोड़कर जा रहे हैं?
बचपन में इतना सब देख लिया कि आज तक जमीन से जुड़ा हूं: जैकी
बचपन और शुरुआती दौर का किस्सा साझा करते हुए जग्गू दादा ने कहा, '10 बाई 10 के खोली में छह लोग रहते थे। मैं हीरो बनने के बाद भी वहीं रहा। ये सभी जमीन से जुड़ी बातें वहीं सीखी मैंने। तीन बाथरूम थे और 30 लोग थे। एक बाथरूम उन्होंने मुझे दे दिया कि आप स्टार बन गए हैं, तो ये आपको गिफ्ट। उनका दिल देखो। मैंने मना कर दिया कि नहीं मेरे घर में छह लोग हैं बस। फिर भी उन्होंने ताला लगाकर मुझे एक पर्सनल बाथरूम दे दिया। ऐसा कौन करता है?'आगे जैकी बोले, 'आज मेरे पास दो बाथरूम हैं कही भी जाऊं पर तब का दौर याद करके लगता है कि हम जमीन से जुड़े लोग हैं। वह देखकर लगता है कि प्यार मोहब्बत से जियो। गम बांटकर प्यार से रहो।'
सिद्धू बोले, मुझे पॉलिटिक्स सबसे बढ़िया लगी
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला संवाद के मंच पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी पहुंचे। सिद्धू ने अमर उजाला संवाद के मंच को संबोधित करते हुए कहा, बढ़िया तो मुझे पॉलिटिक्स लगी। राजनीति इसलिए अच्छी लगी कि वह लोगों को ताकत देती है। लेकिन सारी पार्टियां एक ही तरह की गलती करती हैं। मैंने कई सारे काम किया लेकिन बढ़िया मुझे राजनीति लगी। मेरे लिए वह मिशन था। अब मैं राजनीति से दूर जा चुका हूं। आज मैं आपसे सफलता के बारे में बात करने के लिए आया हूं। इंसान गलतियों का पुतला होता है। उससे गलतियां होती रहती हैं। मैंने जीवन में कभी गोल पर निगाह नहीं रखी। मेरा फोकस साधना में है।
'...क्योंकि लखनऊ की भूमि में नजाकत है?'
सिद्धू ने कहा कि, प्रणाम करता हूं मैं इस भूमि को क्योंकि ये मेरे अस्तित्व में है। मेरी जो कमबैक हुई 1987 में उसकी बुनियाद लखनऊ के शीश महल टूर्नामेंट ने रखी थी। वो टूर्नामेंट में सात शतक बने तो टीम में जगह बनी। टेस्ट में कमबैक जब मुरली को सात छक्के लगे थे, वॉली हैमंड के आठ छक्कों का रिकॉर्ड, वो भी इसी जगह केडी सिंह बाबू स्टेडियम में हुआ था। इसलिए मैं उस भूमि को प्रणाम करता हूं, क्योंकि लखनऊ की भूमि में नजाकत है। महामाई पार्वती का प्रताप है। झुक कर मैं आपको प्रणाम करता हूं। "झुकते वो हैं, जिनमें जान होती हैं, अकड़ना मुर्दों की पहचान होती है"।
'जीवन में सबसे बड़ी गलती भय से शुरू होती है'
सिद्धू ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी गलती भय से शुरू होती है। संशय सफलता का सबसे बड़ा अवरोध है। जीवन की सबसे बड़ी कमी वही है। 1983 में चार सौ लोग कपिल का इंटरव्यू लेने आए। सब विदेशी पत्रकार थे। कपिल को अंग्रेजी आती नहीं थी। मैंने उनसे कहा कि जैकी श्रॉफ की नई फिल्म लगी है 'हीरो'। वह देखकर आते हैं। कपिल ने कहा चलो बात करते हैं।
कपिल ने विदेशी पत्रकार को दिया करारा जवाब
सिद्धू ने कहा कि कपिल देव से पत्रकारों ने पूछा कि हम दूसरा कपिल क्यों नहीं पैदा कर पा रहे हैं। कपिल ने कहा कि मेरी मां 62 साल की हैं पिता नहीं है। इसलिए दूसरा कपिल नहीं पैदा कर पाए। तो गुरु इंट्रोडक्शन की इसलिए जरूरत नहीं, क्योंकि प्रेम परिचय को पहचान बना देता है, वीराने को गुलिस्तान बना देता है, मैं आपबीती कहता हूं, गैरों की नहीं, प्रेम इंसान को भगवान बना देता है। सिद्धू ने अमर उजाला के मंच पर शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा, 'वो दरिया ही नहीं, जिसमें नहीं रवानी, जब जोश ही नहीं किस काम की तेरी जवानी।' उन्होंने आगे कहा, जरूरी नहीं है कि जो आपको बढ़िया लगे, वही आपकी राह हो।
सिद्धू ने आगे कहा, 'तो गुरु मैं एक पब्लिक स्कूल बैकग्राउंड से था। फर्राटे की इंग्लिश बोलता था। लेकिन दम नहीं था कि कोई प्रिंसिपल मुझसे ये कहता कि सिद्धू स्कूल को डिसपर्स करना है। क्लास मॉनिटर था, लेकिन टांगे कांपती थीं। सबकुछ आपके सोचने की शक्ति पर है। आप जैसा सोचेंगे वैसा बन जाएंगे। यही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। जो चीजें जीवन में होनी नहीं है, आप उनके बारे में सोच के भयग्रस्त हो जाते हो।' सिद्धू ने इस दौरान दिवंगत गायिका आशा भोसले को भी याद किया। उन्होंने कहा, आशा भोसले जी चली गईं, लेकिन एक जबरदस्त गाना अभी भी जहन में है- आगे भी जानें न तू, पीछे भी जानें न तू, जो भी है इस पल को थाम, पल को थाम शहंशाह हो जाएगा।
सिद्धू ने शायरी भी सुनाई, सचिन को लेकर सुनाया किस्सा
सिद्धू ने कहा, जब आप पल में जीना सीखोगे, जो आपके भीतर ताकत है, उसके भरोसे रहोगे, तो भय आएगा ही नहीं। सचिन तेंदुलकर...15 साल का बच्चा, मैंने कहा कैसे ये पाकिस्तान जा रहा है, कैसे भेड़ियों के सामने डाल दिया है इसे, ये तो इसको निगल लेंगे। लेकिन जब वहां पहुंचा तो पता चला कि सचिन चीज क्या है। दो कहानियां सुनाऊंगा। 15 साल की उम्र में सचिन अपने पहले मैच में जीरो, दूसरे मैच में सात और आठ, तीसरे मैच में ड्रॉप और चौथे मैच में हिंदुस्तान की टीम पर इमरान खान इतना आगबबूला हो गया था कि भारतीय यहां आकर तीन टेस्ट ड्रॉ कर गए।
उन्होंने कहा, वकार यूनुस, वसीम अकरम, आकिब जावेद, सपनों में आने वाले बॉलर थे। चौथे टेस्ट में पिच पर काफी घास थी। उस मैच में तेंदुलकर की वापसी होती है आखिरी दिन। मैं बैटिंग कर रहा हूं। वसीम अकरम ने बाउंसर मारी, मैंने डक किया। फिर रवि शास्त्री ने सामने से कहा कि क्या कमाल छोड़ी है, मैंने कहा मुझे तो दिखी ही नहीं। इसके बाद रवि को एक बाउंसर पड़ी और वो आउट हो गए। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं अनलकी हूं। मैंने कहा कि आप लकी हो कि बाहर जा रहे हो, मैं कहां ये सब झेल रहा हूं। फिर देखता हूं छोटा सा बच्चा 15 साल का सचिन पूरे आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करने आता है। मैंने सोचा इसके बाद तो कुंबले ही हैं, अगर अब विकेट गया तो धर-धर सब आउट हो जाएंगे। खेला खत्म है। मैंने सोचा कि घंटे भर में खेला खत्म है।
आचार्य मनीष बोले-लाइफस्टाइल, योगा और डाइट अगर सीख गया तो व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ेगा
- फोटो : Amarujala.com
सत्र सेहत और सार्थक जीवन में आयुर्वेदा एक्सपर्ट आचार्य मनीष बात रख रहे हैं। आचार्य मनीष जी केवल एक आयुर्वेद विशेषज्ञ ही नहीं हैं, वह एक विख्यात मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। आचार्य मनीष ने स्वस्थ रहने के बारे में बताया।
आचार्य मनीष कहते हैं, अगर पूरा भारत सीख जाए कि अगर कोई भी बीमारी आए तो 2-3 दिन कुछ न खाएं, व्रत पर चले जाएं तो बड़ी से बड़ी बीमारी के खतरे को दूर किया जा सकता है। ट्यूमर, हार्ट, रसौली जैसी दिक्कतें आसपास भी नहीं भटकेंगी।
आचार्य मनीष कहते हैं, बहुत जरूरी है कि स्कूल से ही बच्चों को आयु्र्वेद पढ़ाया जाना चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वह क्या खाएं-क्या न खाएं? किस मौसम में क्या खाएं? कौन सी चीज के साथ क्या न खाएं?
आयु्र्वेद साफ कहता है कि फल और दूध एक साथ नहीं लेना चाहिए, इसे इंफ्लेमेशन होता है। पर हम सभी मैंगो शेक, बनाना शेक खूब पीते हैं। मैंगो शेक, बनाना शेक पीना है तो बादाम या नारियल के दूध में पीना चाहिए, गाय या भैंस के दूध के साथ तो बिल्कुल नहीं।
आचार्य मनीष ने कहा कि जो बीमार पड़ने ही ना दे, वो श्रेष्ठ है। बीमार पड़ने के बाद कभी पंक्चर लग रहा है, कभी किडनी चेंज। उन्होंने बताया कि जब तक आपकी किडनी 70 फीसदी खराब नहीं हो जातीं। तब तक आपकी रिपोर्ट नॉर्मल आती रहेंगी। आप गलतफहमी में रहेंगे कि आपकी रिपोर्ट निर्मल है। रिपोर्ट के चक्कर में कन्फ्यूज हो जाता है। अगर लीवर आपका 85 फीसदी खराब नहीं हो जाएगा, तब तक रिपोर्ट में नहीं आएगा। आप घर पर ही खुद से अपनी जांच कर सकते हैं। सुबह 9 बजे से लेकर रात 9 बजे तक अपने यूरिन को एक बॉटल में भर लीजिए। एक अलग बॉटल में रात 9 बजे से सुबह 9 बजे तक के यूरिन को भर लीजिए। अगर रात का यूरिन, दिन के यूरिन से तीसरा या चौथा हिस्सा है तो ये संकेत है कि आपकी किडनी ठीक है।
'...तो समझो लीवर का बेड़ा गर्क होने वाला है'
उन्होंने कहा कि अगर आप साढ़े 10 बजे सो जाते हो, और आपकी नींद ढाई से तीन बजे नींद खुलती है तो समझो लीवर का बेड़ा गर्क होने वाला है। बॉडी इशारा देगी। इसकी जांच की तरीका भी जान लीजिए। अगर आप 10-11 बजे से जाते हो और रात में 2:30 -3 बजे नींद खुल जाती है तो ये लिवर की समस्याओं की तरफ इशारा हो सकता है।
ऐसे ही आप सुबह 9-10 बजे ब्लड प्रेशर की जांच करिए। फिर यही काम रात में 9-10 बजे भी करिए। अगर सुबह का ब्लड प्रेशर, रात के बीपी से 10-15% ज्यादा है तो ये हेल्दी हार्ट का संकेत है। आपको हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का जोखिम कम है।
'जिम करना बहुत अच्छा है, लेकिन...'
जिम करने के सवाल पर आचार्य ने कहा कि जिम करना बहुत अच्छा है। लेकिन जिम में जाकर जो सप्लीमेंट्स मिलते हैं वो लेना भयंकर गलत हैं। आज-कल किडनियां फेल हो रही हैं। हमारे पास रोज मरीज आ रहे हैं। हार्ट अटैक पड़ रहे हैं, रोज मरीज आ रहे हैं। वजन बढ़ाने के पाउडर से हिप ज्वाइंट घिस जाते हैं। किडनी फेल होना तो कॉमन प्रोबल है। हमें बचपन से आदत गलत हो गईं, आज की तारीख में हमारा पेट भी साफ नहीं हो रहा है। हम इंग्लिश सीट का प्रयोग कर रहे हैं।
दूध-घी के लिए शुरू की कुश्ती- संग्राम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मैं हमेशा एक बात बोलता हूं कि जिंदगी वो नहीं होती जो हमें मिलती है, जिंदगी वो होती है जिसे हम बनाते हैं, मेहनत करके, कोशिश करके। जैसे कि बाकी दो कह रहे हैं कि कुश्ती बहुत मेहनत का काम है। बॉक्सिंग में आपके ग्लब्स हो गए, क्रिकेट में बैट हो गए, बैडमिंटन में रैकेट हो गया, जूडो में आपने कपड़ा पकड़ लिया। कुश्ती ऐसा खेल है जिसमें आप सामने वाली की बॉडी पकड़ेंगे, उसे कनेक्ट करेंगे। दांव लगाएंगे, तो सबसे मुश्किल स्पोर्ट्स है ये। जब हमने गांव में कुश्ती देखी, तो वहां पहलवानों को दूध मिल रहा था, घी मिल रहा था, पैसे मिल रहे थे, तो मैंने सोचा कि काश मैं भी पहलवान होता।
एक सच्चाई यह थी कि क्रिकेट का बैट आता था 25-30 रुपये का, बैडमिंटन तो आज भी नहीं है। मैं एक बार लिएंडर पेस को बोल रहा था कि अगर हरियाणा में टेनिस पहुंच गया और ग्राउंड बन गए, तो साउथ वाले नहीं जीत पाएंगे। फिर तो हम नॉर्थ वाले ही जीतेंगे। हरियाणा में जो पहलवान होता था, उसके बारे में चौपाल में बात चलती थी। सब मुझे चिढ़ाते थे क्योंकि मुझे अर्थराइटिस था, तो मैं सोचता था कि थोड़ा तगड़ा बन गया, तो दूध मिलेगा, घी मिलेगा, आस पड़ोस में मेरी बात होगी। इस वजह से मैंने कुश्ती शुरू की।
पहले यूपी में दंगा, पलायन जैसी समस्या थी: जयवीर सिंह
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, पहले तो हम उत्तर प्रदेश के जनमानस को बहुत-बहुत प्रमाण करना चाहते हैं। पहले तो जनता का धन्यवाद, जिन्होंने योगी सरकार को जनादेश दिया। सरकारी मुलाजिमों को वेतन देने के लिए भी सरकारी खजाने में पैसे नहीं होते थे। दंगा, पलायन जैसी समस्या थी। आज सीएम योगी के नेतृत्व में जिस प्रकार से कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है उसकी चर्चा देश विदेश तक है। मंत्री जयवीर सिंह अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। 'ट्रिलियन डॉलर यूपी- संकल्प से सिद्धि' विषय पर चर्चा की जा रही है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि माफिया पर जब यूपी सरकार का डंडा चला तो, जनता का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा। इसके बाद विकास, लोक कल्याण के रास्ते खुलते चले गए। एयर कनेक्टिविटी, रोड कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई। पहले जो लोग व्यापार छोड़कर बाहर चले गए हैं वह भी यूपी लौट रहे हैं।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, जहां राष्ट्रीय जीडीपी की ग्रोथ लगभग 7-8 प्रतिशत है। वहीं यूपी की जीडीपी ग्रोथ 11 प्रतिशत से ऊपर है। यह दर्शाता है कि यूपी की विकास दर जितनी तेजी से बढ़ रही है, जिन लक्ष्यों के साथ सभी विभाग इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हम विश्वास करते हैं, आने वाले समय में यूपी और तेजी से आगे बढ़ेगा।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि जहां 2017 में 23 करोड़ पर्यटक सलाना के साथ जहां हम लोग बहुत पीछे थे, वहीं आज पिछले दिसंबर 2025 तक एक साल में 166 करोड़ पर्यटक यूपी आए। उत्तर प्रदेश का पर्यटन और संस्कृति विभाग इस दिशा में आगे भी काम कर रहा है।
श्वेता त्रिपाठी ने लखनऊ से जुड़ी यादों को किया साझा
श्वेता त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
संवाद के मंच पर अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी पहुंचीं। उनके साथ 'नई सोच की नायिकाएं' विषय पर चर्चा की गई। श्वेता त्रिपाठी ने लखनऊ से जुड़ी यादें सुनाते हुए कहा, लखनऊ मेरी नानी का घर है। यहां गर्मी की छुट्टियों से जुड़ी यादें हैं। बहुत गर्मी होती थी, उसमें भी हम खूब मस्ती करते थे। यहां का खाना तो आज भी याद है। आज हमने खस्ते और आलू खाए।
श्वेता त्रिपाठी ने कहा, नई सोच में सबसे मुश्किल चीज होती है कि हमारी जो खुद की सोच होती है, उसमें बहुत सारी चीजें होती हैं जो हमारी सोच को हमारी बनाती है। हम क्या फिल्मे देखते हैं। हम नाटक देखने जाते हैं या नहीं। आर्ट और कल्चर से एजुकेशन से जब हम खुद को जोड़ते हैं तो ये सब चीजें हमें बहुत प्रभावित करती हैं। मेरा बैकग्राउंड बहुत अकेडमिक है। मैं खुद को बहुत लकी मानती हूं कि मुझे लखनऊ का कल्चर मिला। मेरी सोच बदलती रही और यह बहुत जरूरी है।
गोलू के किरदार से लाइफ कितनी बदली?
जवाब- मिर्जापुर तो लव है हमारा। गोलू और मिर्जापुर अब मेरे साथ नौ साल से हैं। नौ साल की रिलेशनशिप बहुत सुंदर होती है। इस सफर में क्या-क्या जुड़ा? अली फजल, वो भी लखनऊ से हैं। मिर्जापुर की जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी और पहला एपिसोड पढ़ा तो बहुत मजा आया। मुझे पता था कि मुझे इसका हिस्सा होना है। गोलू के साथ-साथ मैंने भी बहुत ग्रोथ की है।
मिर्जापुर की फिल्म भी आने वाली है?
हमारी फिल्म लंबी तो होगी। आप क्या कहानी बताना चाहते हो, कितना टाइम चाहिए उसे बताने में। हम एक्टिंग तो उतनी ही करेंगे। लेकिन, सीरीज में आप डूब सकते हो। उसका मजा अलग है। ओटीटी ने राइटर, डायरेक्टर, महिला किरदार, क्रू सदस्यों को बहुत सारे मौके दिए हैं। महिलाओं को अब सिर्फ ब्रैकेट में नहीं डाला जा रहा है। किरदार में अब नए कलर और फ्लेवर हैं।
संवाद के मंच पर तीनों सेनाओं की विशिष्ट शख्सियतें
मनोज कुमार, विंग कमांडर रिटायर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
संवाद के मंच पर भारतीय सेना के मेजर जनरल अश्विनी कुमार चन्नन, भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार और भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार पहुंचे। तीनों से 'रणनीतिक शक्ति से आर्थिक समृद्धि' विषय पर चर्चा की।
चानन बोले- सूचना तंत्र और आत्मनिर्भरता का नया दौर है ऑपरेशन सिंदूर
चन्नन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक युद्ध कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। साल 2019 से ही भारत इस तरह की आधुनिक युद्ध नीति पर लगातार काम कर रहा है। इससे पहले हुए उरी और बालाकोट जैसे सैन्य अभियानों की सत्यता और सफलता पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे। परंतु, इस बार की सैन्य कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ सबके सामने हुई है। यही कारण है कि इसका प्रभाव बहुत बड़े और व्यापक रूप में देश और दुनिया के सामने आया है।
पाकिस्तान के आतंकी कैंप IB से लेकर अफगान बॉर्डर तक हैं? हमारी सेनाओं के पास डीप पेनेट्रेशन की क्षमता कैसी है?
विंग कमांडर मनोज कुमार ने कहा, मैं पिछले साल ही सेवानिवृत्त हुआ है। अब हमारे देश के लिए पहले वाले भारत नहीं रहे। अब सोच बदल चुकी है। हम पाकिस्तान का नाम इस फोरम में लेना नहीं चाहेंगे। अब हम वो भारत नहीं हैं कि लोग आएंगे और हमें मारेंगे। इस सबके के बाद वो बचे रहेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबको समझ आ चुका है। विश्व में ऐसी कोई जमीन नहीं बची है, जहां से वो हमारे ऊपर हमला करेंगे और वो बचे रहेंगे। हम अटैक ऐसा करेंगे जो आपको भी याद रहेगा और आने वाली पीढ़ी को भी याद रहेगा। आप जो जगह बता रहे हैं वह हमारे टारगेट पर पहले से हैं। यह एक ऐसा ऑपरेशन था, जिसमें देश के हर नागरिक ने हिस्सा लिया। यह ऐसा ऑपरेशन था, जिसमें पहली बार इंडिया की शक्ति, जिसमें ड्रोन्स, छोटे-छोटे स्टार्टअप्स शामिल थे। पहली बार ऐसा हुआ था, जिसमें किसी विदेशे हाथियारों की जगह स्वदेशी हथियारों से लड़ रह रहे थे।
नेविगेशन की स्वतंत्रता होनी चाहिए- कमोडोर निशांत कुमार
नौसेना से सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार ने कहा कि होर्मुज अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। दुनिया के कानून कहते हैं कि नेविगेशन की स्वतंत्रता होनी चाहिए। कारोबार और तेल का रास्ता यही है। पूरे विश्व के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से इस जलडमरूमध्य का बहुत महत्व है। हमारी नौसेना ओमान की खाड़ी में तैनात है। वहां से एस्कॉर्ट मिशन होता है। हम संवाद से इस मामले को सुलझाने चाहते हैं, अन्यथा इसके परिणाम गंभीर होंगे। हमारी नौसेना इसके लिए प्रतिबद्ध है कि यह समुद्री रास्ता महफूज रहे। वहां किसी भी देश की नौसेना नहीं पहुंची है। हमारी नौसेना भी होर्मुज के ठीक बाहर मौजूद है। हमें शॉर्ट नोटिस पर किसी भी तरह की घटना के लिए तैयार रहना होगा। हमें हर समय बड़ी लड़ाई लड़ने की जरूरत नहीं है। कम अवधि के विशिष्ट मिशन के लिए हमें तैयार रहना होगा। ऑपरेशन सिंदूर का सबक था कि जब एक बार लक्ष्य हासिल हो गया तो डी-एस्केलेशन यानी टकराव को तुरंत खत्म करना जरूरी है। मुकाम हासिल करके तुरंत वापस आ जाएं।
'संवाद' के मंच पर अभिनेत्री ऋचा चड्ढा
अमर उजाला संवाद के मंच पर अभिनेत्री रिचा चड्ढा।
- फोटो : amar ujala
'संवाद' के मंच पर अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने 'नई सोच की नायिकाएं' विषय पर चर्चा की।
स्टेज पर आने पर या परफॉर्म करती हैं तो क्या बटरफ्लाइज, नर्वसनेस होती है?
जवाब- बटरफ्लाइज तो नहीं, लेकिन जब मेरे बारे में इतनी तारीफ हुईं तो अविश्वसनीय लगता है। लखनऊ मेरा ससुराल है। अपनी यात्रा को लेकर मैं बहुत तहे दिल से शुक्रगुजार हूं। मेरे पसंदीदा करियर में मौका मिला है। मैं फिल्मी खानदान से नहीं हूं। यह अच्छा लगता है कि अपने दम पर यहां पहुंची हूं। लोग नेपोटिज्म पर बात करते हैं। मगर, इसका उल्टा भी होता है। मेरा सक्सेस मेरा खुद का है।
करियर की शुरुआत में किस तरह की सोच के साथ आई थीं? लगा कि मैं जीत गई?
जवाब- किसी का करियर या जिंदगी एक प्रोसेस होती है। उसमें कोई डेस्टिनेशन नहीं होती। मैं जीत और हार के बारे में ज्यादा नहीं सोचती। मुझे अच्छा लगता है कि मैं अपने उसूलों को कायम रखकर अपना काम चुन-चुनकर यहां तक पहुंची हूं। हां, करियर की शुरुआत मैं जरूर कुछ ऐसी स्क्रिप्ट में काम किया, जिन्हें कहते हैं कि अपना दिमाग घर पर रखकर आओ।
शुरुआत से एक्टर बनना चाहती थीं?
जवाब- जी, लेकिन मुझे पढ़ने-लिखने का बहुत शौक था। मैं जर्नलिस्ट भी बनना चाहती थी। मेरी हिंदी-इंग्लिश दोनों बहुत अच्छी थी। म्यूजिक में भी रुचि थी। एक्टिंग का शौक था। फिर रुचि, ऋचा पर हावी हो गई और मैंने अपना करियर पथ चुना।
असल में कोई ऐसा नहीं होता, जैसा दिखता है: ऋचा
गैंग्स ऑफ वासेपुर में रोल करना आसान नहीं था। उसमें बहुत गाली थीं। अब भी सुनने को मिला कि फुकरे वाली मैडम आई हैं, गाली तो जरूर सुनने को मिलेगी। लेकिन, असल में कोई ऐसा नहीं होता, जैसा दिखता है।
बेबाक होना इस इंडस्ट्री में कितना जरूरी है?
सच सूर्य की तरह है। सच का अमर उजाला होता है। आज नहीं तो कल। मेरी कोशिश रहती है कि मैं सच्ची रहूं। जो भी सच बोलता है, उसे भुगतना पड़ता है। लेकिन, यह कीमत मैं भुगतान करने को तैयार हूं।
अमर उजाला संवाद में एक्टर रणदीप हुड्डा।
- फोटो : amar ujala
'अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026' के मंच पर बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा पहुंचे। उनके साथ 'सपनों से स्टारडम तक' विषय पर चर्चा की गई। अभिनेता रणदीप हुड्डा ने अपनी वेब सीरीज इंस्पेक्टर अविनाश को लेकर बताते हुए कहा, मैंने इसमें इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा का किरदार किया है। हमने बहुत ही एंटरटेनिंग सीरीज बनाई है। हरियाणा में बोलते हैं, हम झेल्या ना करें, पैला करैं। इंस्पेक्टर अविनाश कहेंगे। हम झेलते नहीं हैं, पेलते हैं'।
यह किरदार कितना मुश्किल था?
जवाब- कोई भी कहानी हो। जीवित या चल बसे शख्स पर बायोपिक हो...यह उनकी पूरी जिंदगी होती है, जो वह बहुत वर्षों तक जीते हैं। उसे जब आप ओटीटी या बड़े पर्दे पर दिखाने की कोशिश करते हैं तो आपको कहानी दो-तीन घंटे में दिखानी होती है। 40 साल की कहानी को आप दो घंटे में कैसे दिखाएंगे? ऐसे में आप उनकी जिंदगी के सबसे बड़े मकसद को लेकर सबसे बड़ा ब्रिज बनाते हैं। आप 30-40 साल की फिल्म तो नहीं बना पाते। हमारी जिंदगी में हम हमेशा तो कुछ जरूरी नहीं करते। अब तो फोन में ज्यादा लगे रहते हैं। पहले झक मारना भी एक हॉबी होती थी, जिसे अब सब भूलते जा रहे हैं।
यूपी में कितना बदलाव हुआ है पिछले कुछ वर्षों में?
जवाब- मैं यहां पर एक ऑब्जर्वेशन नहीं दे सकता हूं। मैं तो अपने दोस्तों और परिवार के लोगों से कही सुनी बाते हैं वही बता सकता हूं। यूपी अब बहुत सेफ हो गया है। महिलाएं आसानी से मूव कर सकती हैं। क्राइम खत्म हो गया है।
यूपी में सभी महसूस करते हैं बदलाव: रणदीप हुड्डा
मेरे एक को-स्टार थे। उनको कोई गांव में बड़ा तंग कर रहा था, उनके भाइयों को पीट दिया था। मैंने खाली एक ट्वीट किया था और यूपी पुलिस को टैग किया था। घंटों के अंदर परेशान करने वालों को ऐसा सीधा कर दिया कि वो कभी तंग करने नहीं आए। मेरे हिसाब से यूपी में यह बदलाव महसूस करते हैं सब।
सोशल मीडिया पर लोग अच्छी-अच्छी बातें दिखाते हैं। आप गांव के खेत-खलिहान सब दिखाते हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब- सक्सेस का फॉर्मूला सबके लिए अलग-अलग होता है। कोई करोड़ में भी दुखी है। कोई कुछ न होने पर भी ऐसे मुस्कुरा रहा है कि जैसे कहीं का राजा है। खुशी के स्टैंडर्ड को आप किसी से जोड़ नहीं सकते। जड़ों से जुड़े होने का मुझे यह लगता है कि अगर आपको ये नहीं पता कि आप कहां से आए हैं, तो आप कहां जा रहे हैं इसका कोई फायदा नहीं है। मुझे 25 साल मुंबई में हो गए। लेकिन, कोई पूछता है कि कहां से हो तो कहता हूं कि जसिया से हूं, रोहतक।