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अमर उजाला की वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन

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प्रतियोगिता के विजेताओं को किया गया सम्मानित।
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युवाओं ने समझाए ‘एक देश-एक चुनाव’ के फायदे-नुकसान
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लखनऊ। अपने सामाजिक सरोकारों की शृंखला में ‘अमर उजाला’ श्री मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को किया गया। विवि के लोक प्रशासन सभागार में आयोजित प्रतियोगिता में ‘देशहित में एक देश एक चुनाव’ विषय पर विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों की 17 टीमों ने पक्ष और विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किए।
इस सार्थक बहस में अवध गर्ल्स पीजी कॉलेज की महिमा त्रिपाठी व हर्षिता की टीम अव्वल रही। जबकि लखनऊ विश्वविद्यालय की अनम खान व अग्रणी गुप्ता की टीम दूसरे, नेशनल पीजी कॉलेज के प्रणय मिश्रा व ओमनी सिंह की टीम तीसरे स्थान पर रही। प्रतियोगिता में बेस्ट स्पीकर (पक्ष) में नवयुग कन्या महाविद्यालय की सुहासिनी घोष व बेस्ट स्पीकर (विपक्ष) में अवध गर्ल्स पीजी कॉलेज की हर्षिता चुनी गईं। विजेताओं को नकद पुरस्कार व सर्टिफिकेट दिया गया। प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए। निर्णायक मंडल में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के प्रो. अश्वनी कुमार दुबे, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. अनूप भारतीय व डॉ. विनीत डेविड शामिल थे। मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. आरके सिंह व निर्णायक मंडल ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।
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इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के सांस्कृतिकी के निदेशक प्रो. एनके पांडेय भी उपस्थित रहे। प्रति कुलपति व निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों को स्पीच व डिबेट के बीच का अंतर समझाया। वक्ताओं ने कहा कि ‘अमर उजाला’ ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर युवाओं को अपनी तर्क क्षमता दिखाने का मौका दिया, जो उनकी प्रतिभा को निखारने में सहायक होगा। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से लविवि के विद्यार्थियों विभू बनर्जी, शुभी अवस्थी, दुर्गेश त्रिपाठी व कोमल ने किया।
पक्ष में आए ये विचार
विषय के पक्ष में विचार रखते हुए विद्यार्थियों ने कहा कि इस बार चुनाव में 60 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए, जिस पर रोक लगेगी। इस पैसे को देशहित में प्रयोग कर सकेंगे। साल भर कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं। समय व संसाधन की बचत होगी। सरकारी कर्मचारियों व सुरक्षा बलों को अपना मूल काम करने का अवसर मिलेगा। केंद्र-राज्य मिलकर बेहतर काम कर सकेंगे। पूर्व में 1952 से लेकर 1962 तक यह प्रयोग हो चुका है और सफल रहा है। बार-बार आचार संहिता नहीं लगानी पड़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन पर इसका असर नहीं पड़ेगा। वैचारिक प्रदूषण, आरोप-प्रत्यारोप व राजनीतिक रंजिश कम होगी। इससे लोग वोट को अपनी जिम्मेदारी समझेंगे बोझ नहीं।
विपक्ष में आए ये विचार
अगर लोकसभा किसी वजह से भंग हो जाती है तो अन्य राज्यों का क्या होगा? अधिकतर लोग एक ही पार्टी को वोट करेंगे। संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा, संविधान संशोधन करना पड़ेगा। राष्ट्रीय पार्टी और मजबूत होगी। क्षेत्रीय दल समाप्त हो जाएंगे। क्षेत्रीय मुद्दे खत्म हो जाएंगे। भारत विविधताओं का देश है, यही उसकी पहचान है। राष्ट्रपति शासन को बढ़ावा मिलेगा। ज्यादा ईवीएम खरीदनी पड़ेंगी। अतिरिक्त सुरक्षाबल व कर्मचारी कहां से लाएंगे? केंद्र-राज्य के बीच मतभेद बढ़ेगा। गरीबी, भुखमरी, इंसेफेलाइटिस, जलसंकट जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना होगा। भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। नेताओं की जवाबदेही कम हो जाएगी। बंगाल व जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों को कैसे डील करेंगे?
ये रहे प्रतिभागी
1- लखनऊ विश्वविद्यालय- अनम खान, अग्रणी
2- बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय- शुभम तिवारी, अरीबा फातिमा
3- डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय- दिलीप, रामपत
4- ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी-फारसी विश्वविद्यालय- सत्यपाल सिंह, पप्पू यादव
5- बीएसएनवी पीजी कॉलेज- सिद्धार्थ शुक्ला, यश मिश्रा
6- गुरु नानक गर्ल्स डिग्री कॉलेज- सिमरन सिंह, महिमा सिंह
7- शिया पीजी कॉलेज- पूजा उपाध्याय, खुशबू मिश्रा
8- नेशनल पीजी कॉलेज- प्रणय मिश्रा, ओमनी सिंह
9- जय नारायण महाविद्यालय- रजत बाजपेई, उत्कर्ष द्विवेदी
10- अवध गर्ल्स पीजी कॉलेज- महिमा त्रिपाठी, हर्षिता
11- खुन-खुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज- दीपाली कश्यप, यशी गुप्ता
12- लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज- लक्ष्मी नारायण मिश्रा, अभिनव मिश्रा
13- विद्यांत हिंदू डिग्री कॉलेज- कृष्णा कुमार शुक्ला, विशाल कुमार
14- नवयुग कन्या महाविद्यालय- सुहासिनी घोष, नेहा गुप्ता
15- आईटी गर्ल्स डिग्री कॉलेज- सारा, अनन्यता तिवारी
16- लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज- शक्ति प्रताप सिंह, अदित्री उपाध्याय
17- महिला महाविद्यालय- महिमा यादव, रिदा फातिमा
एक साथ चुनाव कराने से नेताओं को काम करने का समय मिलेगा। संविधान में संशोधन किया जा सकता है। इस आयोजन से युवाओं को अन्य लोगों के विचार जानने के भी मौके मिलेंगे।
- महिमा त्रिपाठी
‘अमर उजाला’ ने चुनाव जैसे अहम मुद्दे पर युवाओं को अपनी बात रखने का मौका दिया। हमारे विचार सरकार तक पहुंचेंगे और वो सही निर्णय करेगी। इसकी तैयारी में हमारी जानकारी भी बढ़ी।
- हर्षिता
हमें राजनीति से ऊपर उठकर अपनी बात सही प्लेटफॉर्म पर रखने का मौका मिला। आज ऐसा कल्चर हो गया है कि हर बात को राजनीति से जोड़कर देखने लगते हैं। इससे ऊपर उठकर देशहित के बारे में सोचना होगा।
- अनम खान
‘अमर उजाला’ द्वारा आयोजित प्रतियोगिता से मुझे एक नया अनुभव मिला। यह एक ऐसा मंच था, जहां से हमारे आगे बढ़ने के रास्ते खुलते हैं। अपनी बात को सही तरीके से रखने की भी जानकारी इस आयोजन से मिली।
- अग्रणी गुप्ता
सरकार के निर्णय से पहले ‘अमर उजाला’ ने हमें इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी बात रखने का मौका दिया। हमारे विचार और हमारे वोटों से ही सरकार बनती है। छात्रों-युवाओं के बीच इस मुद्दे पर जागरूकता से सही निर्णय होगा।
- प्रणय मिश्रा
पहली बार कॉलेज से बाहर आकर इतने लोगों के बीच अपनी बात रखी। यहां आकर काफी चीजें सीखने और विषय पर भी जानकारी लेने का अवसर मिला। इसकी तैयारी के लिए मैंने काफी जानकारी जुटाई थी, जो आगे भी काम आएगी।
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- ओमनी सिंह
एक देश-एक चुनाव से केंद्र व राज्य के बीच समन्वय में आसानी होगी और विकास कार्य बढ़ेंगे। चुनावों पर बढ़ता खर्च व ब्लैक मनी को रोकना सबसे ज्यादा जरूरी है। प्रतियोगिता में हमें कई नई चीजें सीखने का मौका मिला।
- सुहासिनी घोष

वाद विवाद प्रतियोगिता के प्रतिभागी

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