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पिता, भाई जेल में, चुनाव की कमान संभाल रही है लंदन रिटर्न बेटी

Mon, 06 Mar 2017 01:07 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, नौतनवां-महराजगंज
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अमनमण‌ि की बहन तनुश्री
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नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले की नौतनवां विधानसभा सीट सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे और पत्नी की हत्या के आरोपी अमनमणि त्रिपाठी के मैदान में होने से सुर्खियों में है। 
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यह पहला मौका है जब इलाके के किसी चुनाव में अमरमणि और अमनमणि (पिता-पुत्र) दोनों जेल में हैं और चुनाव की पूरी कमान यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से मास्टर्स की डिग्रीधारी अमरमणि की बेटी तनुश्री और अलंकृता त्रिपाठी के हाथ में है।

पूर्वांचल की यह सीट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां अमनमणि और सपा प्रत्याशी कुंवर कौशल किशोर सिंह उर्फ मुन्ना के बीच की सियासी जंग दोनों प्रतिद्वंदी परिवारों का भविष्य तय करने वाली साबित होगी। 
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अमन अगर लगातार दूसरी बार चुनाव हारते हैं तो इस परिवार के सियासी भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। वहीं, मुन्ना यदि तीन हार के बाद मिली जीत नहीं बचा पाते हैं, तो उनकी पिछली जीत तुक्का मानी जाने लगेगी। यहां का चुनाव इसी समीकरण के इर्द-गिर्द घूम रहा है। दोनों ही खेमों से बिना लागलपेट एक दूसरे को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी बताया जा रहा है।

वैसे यहां के लोग मुकाबला जरूर चतुष्कोणीय मानते हैं, लेकिन अमन और मुन्ना का नाम हर किसी के जुबान पर है। मुन्ना के चुनाव की कमान पूर्व सांसद अखिलेश सिंह संभाले हुए हैं तो अमनमणि की कमान बहन तनुश्री ने संभाल रखी है। 

बहन ने बताया पिछला चुनाव क्यों हारा था अमनमण‌ि

अमनमणि - फोटो : amar ujala
अमरमणि और अमन के न होने के बावजूद तनुश्री के कार्यालय पर भी सैकड़ों लोगों की भीड़ नजर आती है। लोग कह रहे हैं कि चुनाव मुन्ना लड़ें या अमन, प्रतिष्ठा अखिलेश और अमरमणि की ही भिड़ती है। इस बार भी ऐसा ही है।

अमनमणि के चुनाव की संचालक उनकी बहन तनुश्री कहती हैं कि उनके परिवार की राजनीतिक प्रतिष्ठा खत्म करने के लिए बड़ी-बड़ी साजिश रची गई। 

नौतनवां की जनता इसे बखूबी जानती है। वे कहती हैं कि उनके पिता ने बहुत काम किया। पिता पहली बार विधायक बने तो सरकार स्कूल खुलवाए। पहले 8 के बाद लड़कियों की पढ़ाई के लिए कॉलेज नहीं था। अब लड़कियां भी इंटरमीडिएट से बीएड तक की पढ़ाई घर के पास ही कर सकती हैं। 

पिताजी ने बड़ी-बड़ी सड़कें बनवाईं। उनके समय में नौतनवां में 24 घंटे बिजली मिलती थी। से कहती हैं कि मोदीजी आज सोलर लाइट की बात करते हैं। मेरे पिता ने 20 साल पहले बनटांगियां के बीच सोलर लाइट की व्यवस्था करवाई थी। वे भविष्य के नेता थे।

तनु कहती हैं कि पिछला चुनाव अमन अनुभव की कमी के चलते 20-25 साल से राजनीति कर रहे मुन्ना से हार गए थे। इस बार अमनमणि मैच्योर हो गए हैं। वहीं, मुन्ना से लोग खुश नहीं हैं। 

पिता और भाई से जुड़े आपराधिक मामलों पर कहती हैं कि जनता सारी सच्चाई जानती है। मैं अपने पिता को ग्रेट लीडर मानती हूं और जनता भी। वे कहती हैं कि वह समाजवाद से प्रभावित हैं लेकिन अखिलेश यादव के समाजवाद से नहीं।

विधायक रहते अमरमणि ने खूब मनमानी की, कब्जे किए : मुन्ना

अमन‌मणि - फोटो : amar ujala
नौतनवां के विधायक और सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी कुंवर कौशल सिंह मुन्ना दावा करते हैं कि वे प्रदेश के पहले विधायक होंगे, जिसने विधायक निधि के एक-एक पाई का हिसाब बुकलेट छपवाकर जनता को दिया है। 

वे अपने काम गिनाते हुए कहते हैं कि शहर की रोड, गलियां दुरुस्त कराया। बिजली पर 80 लाख रुपये विधायक निधि से खर्च किया। इसके अलावा 2.5 करोड रुपये बिजली पर खर्च किए। जंगल क्षेत्र से जानवार बाहर आकर किसानों की फसल बर्बाद कर डालते थे। 14 किमी. जंगल विधायक निधि से घेरवाया।

वे अमरमणि पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि एक विधायक एक कार्यदायी संस्था को 25 लाख से ज्यादा नहीं दे सकता। पर, अमरमणि ने विधायक निधि का 9.37 करोड़ रुपये अपने ही शिक्षण संस्थानों को दे दिया। वे अमरमणि पर बड़े पैमाने पर कब्जे आरोप लगाते हैं। 

साथ ही कहते हैं कि अमरमणि जेल के भीतर से चुनाव का संचालन कर रहे हैं। उनकी ऑडियो क्लिपिंग लोगों के बीच सुनवाई जा रही है। चुनाव आयोग से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

रोकर- पैर छूकर वोट मांग रहीं अमरमणि की बेटी

बहनों के साथ अमनमण‌ि (फाइल फोटो)
मुन्ना कहते हैं कि अमरमणि की बेटी लोगों के बीच रोकर, पैर छूकर वोट मांग रही है और पैसा बांट रही है, पर कोई देखने वाला नहीं है। वह कहते हैं कि यदि अमरमणि ने विकास किया है तो लड़कियां रोती क्यों हैं? वह कहते हैं कि संवेदना तो उसके साथ होनी चाहिए जिसकी लड़की मरी है। इनसे किसी की क्या संवेदना?

अमनमणि ने पिछला विधानसभा चुनाव सपा से लड़ा था। इस बार भी सपा ने पहले अमनमणि को ही टिकट दिया था। पत्नी की हत्या में अमनमणि के खिलाफ सीबीआई जांच का फैसला हुआ तो सपा मुखिया अखिलेश यादव ने टिकट काट दिया। 

कांग्रेसी विधायक मुन्ना सिंह के लिए यह अच्छा मौका साबित हुआ और सपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया। अमनमणि अब ऑटो चुनाव चिह्न के साथ निर्दलीय मैदान में हैं।
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भाजपा व बसपा की भी उम्मीदें जवां

डेमो प‌िक
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा पांचवें नंबर पर थी, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को इस विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधिक 69,345 वोट मिले थे। 

ये वोट विधायक मुन्ना सिंह के भाई और सपा प्रत्याशी रहे अखिलेश सिंह को मिले 53,246 वोटों से काफी ज्यादा थे। भाजपा इस बार अपने इसी वोट बैंक के  हिसाब से पूरी ताकत से मैदान में है। 

भाजपा के प्रत्याशी समीर त्रिपाठी को भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। कई क्षेत्रों में मोदी के नाम पर उन्हें लोग वोट देने की बात करते हैं। विधानसभा चुनाव में बसपा तीसरे नंबर पर थी और उसे 20673 वोट मिले थे। 

पर, लोकसभा चुनाव में बसपा को भी यहां विधानसभा चुनाव से ज्यादा वोट मिले। पर, 41,202 वोट पाने के बावजूद वह तीसरे नंबर पर ही कायम रही।

विधानसभा चुनाव 2012 में प्रमुख दलों का प्रदर्शन
कौशल किशोर सिंह उर्फ मुन्ना- कांग्रेस- 76584
अमन मणि त्रिपाठी सपा- 68747
सदा मोहन- बसपा- 20673
अशोक कुमार- भाजपा- 6089
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