लखनऊ। जिले में टीबी की दवाओं के वितरण के लिए निकाले गए टेंडर में फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। आरोप है कि कुछ फर्मों ने अपने पास चार पहिया वाहन न होने के बावजूद ई-रिक्शा और अन्य फर्मों के वाहनों की आरसी एडिट कर टेंडर में शामिल कर दीं। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम, राज्य क्षय रोग अधिकारी और सीएमओ तक पहुंची है, जिसके बाद अफसरों ने गोपनीय जांच शुरू कर दी है।
जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय की ओर से फरवरी में नादरगंज स्थित स्टेट ड्रग स्टोर (एसडीएस) से शहर के विभिन्न केंद्रों तक टीबी की दवाएं पहुंचाने के लिए जेम पोर्टल पर चार पहिया और बड़े मालवाहक वाहनों का टेंडर जारी किया गया था। टेंडर की शर्तों में फर्म के पास खुद के चार पहिया वाहन, अनुभव प्रमाण पत्र और ईएमडी जमा करना अनिवार्य था।
गाजियाबाद स्थित कुमार ट्रैवेल्स के प्रोपराइटर अरुण कुमार ने आरोप लगाया है कि टेंडर में शामिल तीन फर्मों ने फर्जी आरसी लगाकर दस्तावेजों में हेराफेरी की। उदाहरण के तौर पर, एक महिंद्रा हाफ डाला की आरसी लगाई गई, लेकिन आरटीओ रिकार्ड में यह नंबर ई-रिक्शे के रूप में दर्ज है। इसी तरह, एक अन्य फर्म ने जिस मालवाहक वाहन की आरसी लगाई, वह आरटीओ रिकॉर्ड में इर्टिगा कार के रूप में पंजीकृत है।
अरुण कुमार ने बताया कि इससे पहले भी यह टेंडर दो बार जारी किया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से उसे निरस्त कर दिया गया था। फरवरी में तीसरी बार जब टेंडर निकाला गया तो उन्हीं फर्मों को योग्य घोषित कर दिया गया, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज लगाए थे। आरोप यह भी है कि एक फर्म ने ईएमडी तक नहीं जमा की, जो नियम विरुद्ध है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल ने बताया कि टेंडर को कमेटी अनुमोदित करती है। हमें शिकायत मिली है, जिसकी जांच कराई जा रही है।