लखनऊ। गोमतीनगर के विनीतखंड स्थित निजी अस्पताल पर वरिष्ठ अधिवक्ता की इलाज में लापरवाही से मौत का आरोप लगा है। प्रयागराज निवासी उनके बेटे सुशील ने मुख्यमंत्री को दूसरी बार पत्र भेजकर अस्पताल का पंजीकरण रद्द करने और दो डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर रोक लगाने की मांग की है। मामले की जांच सीएमओ को सौंपी गई है।
सुशील के मुताबिक, उनके पिता वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव (70) को सांस लेने में तकलीफ के बाद चार जुलाई की रात 11 बजे आईसीयू में भर्ती कराया गया था। छह जुलाई को डॉक्टर ने छाती में संक्रमण बताया। 11 जुलाई को हालत में सुधार बताते हुए उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। आरोप है कि इसके बाद चार दिन तक कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया और स्टाफ के भरोसे इलाज चलता रहा।
आरोप है कि 15 जुलाई को स्टाफ ने अचानक वेंटिलेटर की जरूरत बताई और परिजन से कागजों पर हस्ताक्षर कराए। इसके बावजूद करीब तीन घंटे तक वेंटिलेटर नहीं लगाया गया और न ही आईसीयू में शिफ्ट किया गया। बाद में बाइपैप लगाया गया। हालत बिगड़ने पर हार्ट फेल होने और ईसीजी की बात कही गई। परिजन का दावा है कि पूरी घटना अस्पताल के सीसीटीवी में कैद है।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। आरोप सही मिलने पर संबंधित डॉक्टरों की प्रैक्टिस रोकने की संस्तुति और अस्पताल का पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।