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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा पर जताई नाराजगी, जारी किया अवमानना का नोटिस

Wed, 22 Jan 2020 10:36 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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सांकेतिक तस्वीर
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के 821 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को जरूरी उपकरण मुहैया कराने के मामले में कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल न होने पर नाराजगी जताई है। 
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कोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण देवेश चतुर्वेदी को अवमानना नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ  अवमानना की कार्रवाई की जाए। अगली सुनवाई 14 फरवरी को होगी।

न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने यह आदेश आनंद कुमार श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए निदेशक मेडिकल केयर को भी अवमानना नोटिस पर पूरक जवाब देने का समय दिया है। 
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याचिका में प्रदेश के अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक व बेहतर बनाने के लिए जरूरी आदेश जारी करने की मांग भी की गई है। निदेशक मेडिकल केयर डॉ. सविता भट्ट की ओर से याचिका पर 27 सितंबर 2019 को हलफनामा दाखिल कर कहा गया था कि 17 अक्तूबर 2017 के शासनादेश के अनुपालन में 821 सीएचसी में आवश्यक उपकरण लगाए जा रहे हैं। चूंकि प्रोजेक्ट का आयाम विस्तृत है लिहाजा इसमें तीन महीने का समय लग सकता है।
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कोर्ट ने इस पर 10 जनवरी 2020 को अनुपालन की रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। साथ ही चेतावनी भी दी थी कि यदि जवाब न आया तो प्रमुख सचिव व निदेशक को कोर्ट में हाजिर होना होगा, लेकिन न अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की गई, न ही प्रमुख सचिव हाजिर हुए। 

अलबत्ता निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य कोर्ट में मौजूद रहे। अदालत ने इस पर अवमानना नोटिस जारी किया और प्रमुख सचिव की तरफ से हाजिरी से छूट की दरख्वास्त को अस्वीकार कर अगली सुनवाई पर उनकी हाजिरी सुनिश्चित करने संबंधी आदेश दिए थे। 

इस बार सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव देवेश चतुर्वेदी हाजिर हुए। न्यायालय ने उनकी मौजूदगी में 6 दिसंबर के आदेश का अनुपालन न होने पर उनके खिलाफ  अवमानना नोटिस जारी किया। साथ ही अगली सुनवाई पर प्रमुख सचिव व निदेशक मेडिकल केयर को कोर्ट के समक्ष मौजूद रहने का आदेश दिया।
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