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कृषि कानूनों व इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल की वापसी पर इंजीनियरों का किसानों को समर्थन

Thu, 03 Dec 2020 02:35 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से संघर्षरत किसानों को समर्थन देने का ऐलान किया है।

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फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने गुरुवार को लखनऊ में बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 का ड्राफ्ट जारी होते ही बिजली इंजीनियरों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। इस बिल में इस बात का प्रावधान है कि किसानों को बिजली दर में मिल रही सब्सिडी समाप्त कर दी जाए और बिजली की लागत से कम मूल्य पर किसानों सहित किसी भी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए।

उन्होंने बताया कि बिल  में इस बात का प्रावधान किया गया है कि  सरकार चाहे तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए किसानों को सब्सिडी दे सकती है किंतु इसके पहलेकिसानों को बिजली बिल का पूरा भुगतान करना पड़ेगा जो सभी किसानों के लिए संभव नहीं होगा।
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दुबे ने बताया कि किसान संयुक्त मोर्चा के आवाहन पर चल रहे आंदोलन में कृषि कानूनों  की वापसी के साथ किसानों की यह एक प्रमुख मांग है कि  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 वापस लिया जाए। किसानों का मानना है की इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के जरिए बिजली का निजीकरण करने की योजना है जिससे बिजली निजी घरानों के पास चली जाएगी और निजी क्षेत्र  मुनाफे के लिए काम करते हैं इसलिए बिजली की दरें किसानों की पहुंच से दूर हो जाएंगी।

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बिजली के निजीकरण के उद्देश्य से ही लाए गए हैं बिल

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इस सवाल पर किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि किसानों की आशंका निराधार नहीं है इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट बिजली के निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए हैं।

ऐसे में सब्सिडी समाप्त हो जाने पर बिजली की दरें 10 से 12 रु प्रति यूनिट हो जाएगी और किसानों को 8 से 10 हजार रुपये प्रति माह का न्यूनतम भुगतान करना पड़ेगा।
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