नदवा कॉलेज में हो रही पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक।
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अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि मुस्लिम पर्सलन लॉ बोर्ड आतंकवाद का समर्थक है। सरकार बोर्ड के आय के स्रोतों की जांच कराएगी, क्योंकि टेरर फंडिंग हमारी बड़ी चिंता है। बोर्ड का कोई वैधानिक स्टेटस नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोज सुनवाई के बावजूद इस मुद्दे पर बैठक बुलाना बताता है कि बोर्ड अदालत का सम्मान नहीं करता है और देश के संविधान को नहीं मानता।
उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड का दर्जा सिर्फ एक एनजीओ का है। हमें यह देखना है कि इसकी स्थापना कब हुई। उद्देश्य क्या है और वर्तमान में देश के कानून के दायरे में इनका स्टेटस क्या है? इन्हें फंडिंग कौन कर रहा है? बोर्ड ने हमेशा मुसलमानों का शोषण किया है। उनकी तरक्की पर ध्यान देने के बजाय गुमराह करने का काम किया है। आज जब अयोध्या प्रकरण में फैसला आने वाला है तो इसी एजेंडे पर छह महीने में दूसरी बैठक क्यों रखी?
अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री ने कहा कि जब भी सरकार आतंकवाद पर प्रहार करती है, बोर्ड आतंकियों के समर्थन में खड़ा हो जाता है। एनआरसी और तीन तलाक पर भी उसका रुख अवाम के हितों के खिलाफ है। कहा, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य निजी स्वार्थों के लिए काम कर रहे हैं। यह बोर्ड न सिर्फ अपनी प्रासंगिकता खो चुका है, बल्कि असांविधानिक भी है। बोर्ड सिर्फ देश में माहौल खराब करने का काम कर रहा है।