मथुरा के बिजहारी, अराया निवासी नरदेव सुपरवाइजर का काम करते थे। नरदेव के पिता चंद्रदेव ने इस मामले में कैसरबाग डिपो की बस संख्या UP78 एलएन 1340 के अज्ञात चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि चालक की लापरवाही से उनके बेटे की जान चली गई। छानबीन में सामने आया है कि अनियंत्रित बस पांचों को रौंदते हुए 45 फीट गहरे गड्ढे में पलट गई थी। नरदेव की मौत की खबर सुनकर शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे उनके चाचा सचिन रो पड़े। उन्होंने बताया कि नरदेव तीन साल से सुपरवाइजर थे। कंपनी उन्हें 14,000 रुपये वेतन देती थी। अपना खर्च निकालकर वह सारा रुपये घर भेज देते थे, जिससे परिवार का भरण पोषण होता था। नरदेव का तीन साल का बेटा पार्थ है, जिसे अभी तक पिता की मौत की खबर नहीं है। वह मासूम पिता के घर लौटने का इंतजार कर रहा है। मासूम को नहीं पता कि अब उसके पिता कभी लौटकर नहीं आएंगे।
अधूरा रह गया पिता से किया कर्ज उतारने का वादा
चंद्रपाल किसान हैं। नरदेव का एक भाई बलदेव है। चंद्रपाल ने बताया कि तीन साल पहले बेटी हेमलता की शादी की थी। इसके लिए उन्होंने तीन लाख रुपये कर्ज लिए थे। बेटे ने उनसे वादा किया था कि वह सारा कर्ज उतार देगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। नरदेव ओवरटाइम काम कर कर्ज उतारने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।
ओवरटाइम करने पर दो घंटे का सवा सौ रुपये देता था ठेकेदार
हाईवे पर काम कर रहे ठेकेदार हेमराज ने बताया कि सुबह आठ से शाम पांच बजे तक मजदूरों को काम दिया जाता है। इसके लिए उन्हें पांच सौ रुपये मिलते हैं। इसके बाद मजदूर अपनी मर्जी से ओवरटाइम करते थे। इसके लिए उन्हें सवा सौ रुपये दो घंटे की दर से भुगतान किया जाता था। बृहस्पतिवार को सभी ओवरटाइम कर रहे थे। उन्हें नहीं पता था कि सवा सौ रुपये के चक्कर में उनकी जान चली जाएगी।
शादी की तैयारियों में जुटा था परिवार, अब मातम
बदायूं के रायपुर जगमल के रहने वाले संजीव सागर (24) इंजीनियर थे। बड़े भाई मनोज ने बताया कि पांच भाइयों में संजीव तीसरे नंबर पर थे। मां रामरती और पिता लखनपाल खेती करते हैं। मनोज ने बताया कि संजीव ने आईटीआई करने के बाद बीटेक किया था। इसके बाद निजी कंपनी में इंजीनियर की नौकरी कर रहा था। परिवार में संजीव की शादी की बात चल रही थी। नवरात्रि में गोद भराई और सगाई की तैयारियां थीं। इसी बीच संजीव की मौत की खबर आई और सारी खुशियां मातम में बदल गईं। संजीव की मौत के बाद से परिवार में कोहराम मचा है।
साथ घर जाने की थी तैयारी, वापस गए दोनों शव
पीलीभीत के पिपरा भगू निवासी जगदीश (42) और बाबूराम शनिवार को साथ में घर जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन दोनों के शव एक ही एंबुलेंस में भेजे गए। जगदीश के बड़े भाई महेंद्र पाल वर्मा ने बताया कि दोनों एक माह से हाईवे निर्माण में मजदूरी कर रहे थे। बुधवार को उनकी जगदीश से बातचीत हुई थी। तब उसने दो दिन बाद लौटने की बात कही थी। जगदीश की जगह अब उनका शव घर लाया गया है। जगदीश अविवाहित थे। कई साल पहले उनके माता-पिता का देहांत हो गया था। महेंद्र ने बताया कि घटना की जानकारी पाकर उन्होंने गांव के ही दूसरे मृतक बाबूराम के भाई को बुलाया। इसके बाद परिचितों से आठ हजार रुपये उधार लेकर गाड़ी की। इसके बाद लखनऊ पहुंचे। बाबूराम के परिवार में पत्नी नेमवती, बेटी मधु (3) व बेटा भूपेंद्र (5) है। शुक्रवार को एक ही एंबुलेंस से दोनों शवों को लेकर परिजन पीलीभीत रवाना हो गए। परिजनों ने बताया कि दोनों के मोबाइल फोन नहीं मिले हैं।
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
मृतक संजीव की फाइल फोटो
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