हाल ही में वन निगम के एक बड़े अफसर सस्पेंड हो गए। विभाग में उनकी अलग ही पहचान थी। दरअसल इनकी आदत अकेले मलाई खाने की थी।
कई बार लोगों ने समझाया भी मिल-बांटकर खाइए तो सेहत के लिए अच्छा रहेगा, लेकिन साहब को यह नसीहत समझ में नहीं आई। लोगों की निगाहें टिक गईं उन पर।
साहब को भनक लगी तो बापू भवन के छठे माले पर बैठे आकाओं को साधने में जुट गए। थोड़ी मलाई का स्वाद उन्हें चखा दिया तो वहां मामला सेट हो गया लेकिन जिन्हें मलाई नहीं मिली वे जुट गए खेल बिगाड़ने में।
चर्चा है कि साहब की कारगुजारी पंचम तल पर महकमे का काम देख रहे एक अफसर तक पहुंचाई गई तो उन्होंने भी मलाई में हिस्सेदारी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। साहब मिमियाने लगे।
बड़े साहब ने सोचा ऐसे तो मलाई मिलेगी नहीं इसलिए जहां से वह मलाई निकाल रहे हैं वहां से उन्हें रुखसत ही कर दिया जाए। बस हो गया बंटाधार। कुर्सी तो गई ही, सस्पेंसन की तोहमत अलग से लग गई।
अब देते रहें सफाई कि कुछ नहीं किया। इसलिए कहते हैं कि मलाई अकेले पचाना सबके बस की बात नहीं, बांटकर खाओ तो मजे ही मजे।