कहावत है कि राजनीति में गलती नहीं चूक होती है। गलती तो सुधारी जा सकती है लेकिन चूक आसानी से नहीं सुधरती।
ऐसा ही कुछ लोकसेवा आयोग के नए आरक्षण नियमों को लेकर हो गया है। सरकार के रुख पर आयोग ने भले ही आरक्षण संबंधी नए नियमों की अधिसूचना वापस ले ली हो लेकिन सवाल हैं कि सपा सरकार का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यह संभव ही नहीं है कि आयोग के अध्यक्ष सरकार की जानकारी के बगैर इतना बड़ा फैसला ले लें।
अगर सरकार की जानकारी के बगैर आयोग ने इतना बड़ा फैसला लिया तो इसे वापस करने के लिए सपा मुखिया यह इंतजार क्यों करते रहे कि कोई प्रतिनिधि मंडल उनसे मिले और तब वह फैसला वापस लेने की सलाह या हिदायत दें।