एक पार्टी ने नारा दिया था कि जो जमीन सरकारी है, वह जमीन हमारी है। सपाइयों ने सत्ता तो बदल दी लेकिन इस नारे के असर को नहीं बदल पाए।
इसलिए लालबत्ती वाले कुछ सपाइयों को भी यह नारा काफी भा रहा है। नदियों, पहाड़ियों व जमीन की खोदाई पर नजर रखने के लिए बने विभाग से जुड़े मंत्री अपने जमीन खरीदने के शौक के कारण चर्चा में है।
सिर्फ यही मंत्री नहीं बल्कि अभी हाल तक जमीन से जुड़े महकमे की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्री भी अपने जमीन प्रेम के लिए खासे चर्चा में रहे। अब अगर बड़े जमीन के प्रेम में फंसे हैं तो और पीछे क्यों रहे।
इसलिए सिर्फ लालबत्ती वालों को ही नहीं बल्कि कई नीली बत्ती वालों को भी जमीन की खरीद-फरोख्त का रोग लग गया है। किसी जमीन को लेकर थोड़ा सा भी विवाद समाने आया नहीं कि समझो वह गई किसी लाल या नीली बत्ती वाले के हाथ।
अगर जमीन पंचायत की है और किसी बड़े शहर के करीब है तो फिर कहना ही क्या। रातोंरात जमीन पर किस मालिक की तख्ती लग जाएगी, कहा नहीं जा सकता? सपाई परेशान हैं कि ‘उन’ जैसे नक्शेकदम पर चलने से कहीं अंजाम भी ‘उन्हीं’ जैसा न हो जाए।