फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पैसे खर्च कीजिए और खरीदिए एफबी पर 'लाइक्स'

Mon, 26 Aug 2013 11:50 AM IST
लखनऊ/अभिषेक यादव
विज्ञापन
विज्ञापन
अगर किसी नेता या सेलिब्रिटी के फेसबुक पेज पर लाखों लाइक्स देखकर आप भी प्रभावित हो रहे हैं तो जरा रुकिए। दरअसल साइबर वर्ल्ड में ये लाइक्स पैसे के दम पर खरीदे जा रहे हैं।
विज्ञापन


इसके लिए सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक तो बाकायदा 4 से 19 रुपए प्रति लाइक की दर से लाइक्स बेच रही है। वहीं कई हैकर्स 500 रुपये में 1000 की दर से लाइक्स उपलब्ध करवा रहे हैं।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स व ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर लाइक्स के आधार पर किसी नेता या प्रोडक्ट की लोकप्रियता का मूल्यांकन करना अब विश्वसनीय नहीं रहा। अभी तक पैसे और शराब का लालच देकर समर्थक जुटाने वाले नेता अब पैसा देकर पीआर एजेंसियों के जरिए फर्जी लाइक्स जुटा रहे हैं।
विज्ञापन


लाइक्स में तुर्की है नंबर वन
कांग्रेसी नेता अजय माकन के फेसबुक पेज को करीब 1 लाख लोगों ने लाइक किया है। रोचक तथ्य यह है कि इनमें से 3.1 प्रतिशत ही भारतीय हैं। कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह के पेज को पसंद करने वालों में 33 प्रतिशत तुर्की के लोग हैं। दूसरी ओर कई प्रोडक्ट भी इसी तरह लोकप्रिय किए जा रहे हैं।

साइबर एक्सपर्ट सुमित सिंह बताते हैं कि अब राजनीतिक पार्टियों ने सोशल मीडिया में प्रमोशन शुरू किया है। उन्हें पता है कि सबसे ज्यादा युवा यहां एक्टिव रहते हैं। उनके बीच अपने बात पहुंचाने के लिए वे आईटी एक्सपर्ट्स की सहायता ले रहे हैं।

अब फेसबुक ने भी अत्यधिक लोकप्रिय व्यक्तियों के पेजों को प्रमाणित करना शुरू कर दिया है। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भाजपा के नरेंद्र मोदी जैसे चंद ही नेता हैं जिनके पेज वेरिफाइड हैं। फॉलोवर्स अधिक होने पर संबंधित व्यक्ति को बड़े सम्मानित ढंग से देखा जाता है। लेकिन जब ये लाइक्स फेक तरीके से जुटाए जाएं तो इनकी विश्वसनीयता पर संदेह हो जाता है।
ऐसे बढ़ाई जा रही लाइक्सबॉट एप्लीकेशन का कमालसुमित के अनुसार यह एक ऑटोमेटेड एप्लीकेशन या कहें सॉफ्टवेयर है जो थोक में फर्जी ईमेल आईडी बनाने के काम आता है। इसके जरिए पासवर्ड और फेसबुक अकाउंट भी जनरेट किए जा सकते हैं।

आमतौर पर वेबसाइट्स और ब्लॉग से जुड़ते वक्त ‘कैप्चा’ से गुजरना होता है। यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि वेबसाइट को इंसान ही डील कर रहा है कोई सॉफ्टवेयर नहीं।

लेकिन फेसबुक पर पेज बनाकर फर्जी लाइक्स पाने वाले इस विकल्प को हटा देते हैं। इसके चलते बॉट से बने अकाउंट इन पेजों से बिना किसी रोक के जोड़े जा सकते हैं। इस तरह एक घंटे में 10 हजार लाइक तक हासिल किए जा सकते हैं।
मार्केटिंग के जरिए इसके लिए ऐसी एजेंसियों को हायर किया जा रहा है जो ये लाइक्स उपलब्ध करवाती हैं। खास बात है कि ये एजेंसियां किसी न किसी हैकर्स ग्रुप से जुड़ी होती हैं, जो रूस, पूर्वी यूरोप जैसे देशों के अकाउंट्स से पेज को लाइक करवा रही हैं।
फेसबुक के जरिए फेसबुक भी अपनी वेबसाइट पर लाइक्स के बिजनेस को समझ गया है। यहां पेज प्रमोट करने के लिए 327 रुपये में रोजाना 17 से 69 लाइक्स, 1962 रुपये में रोजाना 103 से 414 तक लाइक्स उपलब्ध करवाए जाते हैं। इसके लिए फेसबुक इंक को ऑनलाइन पेमेंट किया जा सकता है।
सोशल नेटवर्किंग पर शेखी की कीमत •इंस्टाग्राम पर 1 हजार फॉलोअर्स के लिए हैकर्स ग्रुप करीब 975 रुपये चार्ज करते हैं। •फेसबुक की कानूनी तौर पर जायज मार्केटिंग में एक लाइक की कीमत 5 से 19 रुपये तक बैठती है। •सॉफ्टवेयर्स के जरिए 500 रुपये में 1 हजार तक फर्जी लाइक हासिल करवाए जा रहे हैं। •साइबर वर्ल्ड में विभिन्न हैकर्स फोरम सक्रिय हैं जो ट्विटर पर फॉलोवर्स जुटाने से लेकर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक हजार लाइक्स के लिए दो हजार रुपये तक चार्ज कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें