मुलायम यूं ही नहीं सियासी हवा के पारखी माने जाते हैं। मंत्रिमंडल के तीसरे विस्तार के साथ शिवपाल को मिले महत्व व बढ़े कद की लोग वजहें तलाश रहे थे।
लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि शिवपाल को तवज्जो के पीछे कारण क्या है।
पर, दुर्गाशक्ति नागपाल मामले ने इन वजहों को खोलकर रख दिया। कहने को मुलायम पुत्र मुख्यमंत्री अखिलेश के तमाम चाचा हैं।
पर, जब नागपाल मामले में जब मुख्यमंत्री पर हमले होने लेगे तो एक चाचा साथ खड़े होने के बजाय गंगा किनारे यह गाना गाने लगे, ‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट।’
दूसरे चाचा भतीजे के फैसले पर सवाल उठाने लगे। काम आए सिर्फ चाचा शिवपाल।
उन्होंने न सिर्फ भतीजे मुख्यमंत्री के फैसले का समर्थन किया बल्कि मीडिया को ललकारते हुए यहां तक कह दिया, ‘जब हम खनन माफिया के सक्रिय होने की बात करते थे तब तो आप लोग कुछ लिखते नहीं थे।
अब हमारे ऊपर आरोप लगा रहे हैं। नागपाल का निलंबन वापस नहीं होगा।’ मुलायम ने शायद यह बात पहले से ही भांप ली थी कि मुसीबत में अपना ही काम आएगा।