पहले से ही करीब दो अरब के कर्ज से दबे नगर निगम पर पांच करोड़
रुपये का भार और पड़ने वाला है। नगर निगम प्रशासन निर्वाचित पार्षदों की
तरह नामितों को भी कोटा देने की तैयारी में है।
इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार
कर लिया गया है। सदन की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। निगम
प्रशासन निर्वाचित पार्षदों के प्रस्तावों पर सालाना करीब पचास लाख रुपये
के विकास कार्य कराता है।
निर्वाचित
पार्षदों के कोटे पर ही नगर निगम को सालाना करीब 55 करोड़ रुपये खर्च करने
पड़ रहे हैं। आर्थिंक तंगी के चलते इस राशि की व्यवस्था करने में निगम को
काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
वहीं, अब
सालाना करीब पांच करोड़ रुपये का खर्च और बढ़ने जा रहा है। नगर निगम
अधिनियम की व्यवस्था के तहत प्रदेश सरकार दस व्यक्तियों को पार्षद मनोनीत
कर सकती है। नौ सदस्य मनोनीत किए जा चुके हैं।
ये पार्षद
लगातार कोटा देने की मांग कर रहे थे। इसके चलते निगम प्रशासन ने इस संबंध
में प्रस्ताव तैयार किया गया है। वैसे पूर्व में भी नामित पार्षदों को
निर्वाचितों की तरह कोटा दिया गया था।