महोत्सव में इस बार लोग स्वतंत्रता संग्राम और शहर की वास्तुकला से भी रूबरू होंगे।
महोत्सव समिति ने महोत्सव स्थल के प्रवेश द्वारों को छोटे इमामबाड़े व चंदर नगर गेट की शक्ल देने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा जल्द ही महोत्सव में लगाई जाने वाली विरासतों की प्रति कृतियां भी चयनित कर ली जाएंगी। 22 नवंबर से सजने वाले लखनऊ महोत्सव की तैयारियों का दौर तकरीबन अंतिम चरण में पहुंच गया है।
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समिति सचिव आरएस यादव ने रविवार को बताया कि महोत्सव के उत्तरी गेट को छोटे इमामबाड़े की शक्ल दी जाएगी जबकि दक्षिणी द्वार को चंदर नगर गेट की शक्ल में तैयार करवाया जाएगा।
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चूंकि, इस बार की थीम ही ‘जश्न-ए-विरासत’ रखी गई है। इसलिए इन विरासतों को गेट के तौर पर चुना गया, जिसका उद्देश्य लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में अवध की महती भूमिका व नवाबी वास्तुकला से रूबरू कराना है।
उन्होंने बताया कि महोत्सव के अंदर लगने वाली विरासतों की प्रति कृतियों का चयन करना अभी बाकी है, लेकिन जल्द ही इस पर निर्णय ले लिया जाएगा।