शिक्षकों को ट्रेनिंग देने के लिए कार्यक्रम बनाने वाले निदेशालय में आजकल नाराजगी वाले अफसरों को ठिकाने लगाने का खेल चल रहा है।
लखनऊ के प्रभारी संयुक्त निदेशक रहे एक अधिकारी को यहां सर्व शिक्षा अभियान का काम देखने वाले पद पर तैनाती दी गई थी।
चर्चा है कि जब से वे तैनात हुए, उनकी यहां के मुखिया से नहीं बन रही थी। संयुक्त निदेशक भी खराब समय मान कर किसी तरह अपना दिन काट रहे थे।
पर यह भी लोगों से देखा नहीं गया। उनके पद पर यहां दूसरे की तैनाती कर दी गई। उनका काम भी छीन लिया गया।
शासन तर्क दे रहा है कि प्रस्ताव तो निदेशालय से ही आया था। जैसा प्रस्ताव आया, वैसा आदेश जारी हुआ।
अब इन साहब का वेतन तक फंस गया है। पर निदेशालय में इस बात की चर्चा तेज है कि किसी को ठिकाने लगाना हो तो ऐसे लगाओ जैसे अपने साहब को लगाया गया है।