प्रदेश में सरप्लस शिक्षक तो हैं ही नहीं! यूपी के विद्यालयों में पहले हुई
जांच में जितने शिक्षक-कर्मचारी सरप्लस बताए गए हैं, उससे कई गुना ज्यादा
शिक्षकों-कर्मचारियों के पद खाली हैं।
अब यही आधार बनाकर प्रदेश के सभी
शिक्षकों-कर्मचारियों को समायोजित कर उन्हें वेतन देने का रास्ता निकाला
जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने खुद इस तरह की रिपोर्ट तैयार करके
शासन को भेजी है।
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इस रिपोर्ट में कुल 2881 शिक्षक सरप्लास बताए गए हैं।
वहीं 36141 शिक्षक-कर्मचारियों के पद खाली हैं। इनके समायोजन की सिफारिश भी
रिपोर्ट में की गई है।
पूर्वांचल के कुछ
जिलों में फर्जी तरीके से नियुक्ति का मामला उठा था। इस पर कोर्ट ने विभाग
को पूरे प्रदेश में जांच के आदेश दिए थे कि कहां कितने शिक्षक ज्यादा हैं।
इसमें सृजित पदों व उसके अतिरिक्त नियुक्तियों की एक रिपोर्ट तैयार की गई।
इसके अनुसार प्रधानाचार्यों के 4385, प्रवक्ता के 21892, सहायक अध्यापक के
70844, प्रधान लिपिक के 2502, लिपिक के 8407, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के
41020 पद स्वीकृत बताए गए हैं।
वहीं, रिपोर्ट में कुल 2881 शिक्षक-कर्मचारी
सरप्लस बताए गए। उसके बाद शासन ने एक आदेश जारी कर सरप्लस शिक्षकों
कर्मचारियों के वेतन की ग्रांट संबंधित कॉलेजों में रोक दी।
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वेतन रुकने से
कॉलेज प्रधानाचार्यों के सामने समस्या खड़ी हो गई। वे किस आधार पर किस
शिक्षक का वेतन न दें। सभी शिक्षक संगठन भी आंदोलन पर उतर आए।
माध्यमिक
शिक्षक संघ शर्मा गुट, चंदेल गुट, ठकुराई गुट सहित सभी संगठन आंदोलन पहले
भी कर चुके हैं और आगे भी आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं।
इसी बीच शासन के
निर्देश पर निदेशालय ने दूसरी रिपोर्ट तैयार की है। इसमें इनके समायोजन की
सिफारिश की गई है ताकि सभी को वेतन दिया जा सके।
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