‘संडे हो या मंडे रोज खुलेंगे दफ्तर’ को लेकर चर्चा में रहने वाले शिक्षा विभाग के एक निदेशालय में आजकल माहौल कुछ बदला-बदला सा है।
जो मुखिया हमेशा कुर्सी पर बैठा दिखता था, वह आजकल उससे छिटका-छिटका दिखता है।
पहले तो कर्मचारी समझ नहीं पा रहे थे, लेकिन कुछ दिनों बाद यह राज खुला कि इसके पीछे लालबत्ती वाली मैडम हैं।
बताते हैं कि पहले तो साहब ने लालबत्ती वाली मैडम को हल्के में लिया, लेकिन जब मैडम तेवर में आईं तो सकपका गए।
इसलिए मैडम के आने भर की सूचना से साहब इधर-उधर हो लेते हैं।
निदेशालय में आजकल इसको लेकर खूब चर्चाएं हैं, पर कर्मचारियों को इतनी राहत जरूर मिली है कि साहब का सारा ध्यान कर्मचारियों से हट गया है।
अब वे मैडम को मैनेज करने में लगे रहते हैं।