प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य राजनैतिक हस्तियों व देश के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को निशाने पर बताने वाले आतंकियों के तथाकथित लेटर को लेकर सूबे में अलर्ट जारी किया गया है। आला पुलिस अफसरों को एटीएस की रिपोर्ट है कि प्रथम दृष्टया यह सनसनीखेज लेटर किसी की शरारत लग रही है और किसी को फंसाने की मंशा से लिखा गया है।
आर्मी इंटेलीजेंस द्वारा पकड़े गए इस लेटर को राज्य की खुफिया एजेंसी ने उच्च पुलिस अफसरों को सौंपा था।लेटर भेजने वाले कामरान अख्तर ने किसी संगठन का जिक्र न करते हुए राशिद नाम के जिस व्यक्ति को लेटर भेजा है, उसमें कहा है कि उर्दू सीख लें। ऐसा न होने की वजह से लैपटॉप पर टाइप कर भेजना पड़ता है।
कामरान ने राशिद को कोड नंबर 18178 देते हुए जिक्र किया है कि कई पुलिसकर्मी उन लोगों की मदद में हैं। गोमतीनगर में एक पुलिसकर्मी ने माजिद को मकान दिलाया तो आगरा में होटल चलाने वाले अमित कुमार यादव की भी तारीफ की गई है। कहा गया है अमित ने कई बार मदद की है और हमें भी मददगारों का खयाल रखना है।
ताजमहल, अयोध्या सहित कई शहर निशाने पर
लेटर में ताजमहल, लाल किले से लेकर अयोध्या, मथुरा, काशी व लखनऊ और सारनाथ को निशाने पर बताया गया है। यह भी कहा गया है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी को मंसूबे को अंजाम दिया जाना था, लेकिन विलंब हो गया है।
कामरान ने राशिद से कहा है कि निशाने पर कई टार्गेट हैं और इसके लिए विभिन्न स्लीपिंग माड्यूलों को सक्रिय किया जाएगा। दो दिन पहले ही यह लेटर मिलने के बाद सभी जिलों, रेलवे व अन्य शाखाओं को सतर्क कर दिया गया था। रेलवे पुलिस से खास सतर्कता को कहा गया था।
कारण यह था कि पंचायत चुनाव के कारण सूबे में पहले से ही संवेदनशीलता बढ़ी थी। ऊपर से दुर्गा पूजा, दशहरा व मोहर्रम अलग आ गए हैं। एडीजी कानून-व्यवस्था व एटीएस दलजीत सिंह चौधरी ने कहा कि सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक की पड़ताल में यह किसी की शरारत लग रही है। उन्होंने कहा कि एटीएस मामले की छानबीन कर रही एक टीम इलाहाबाद गई हुई है।