लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) एक तरफ जहां इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के नवाचार को आगे बढ़ा रहा है। वहीं अब वह स्कूली विद्यार्थियों में भी नवाचार के बीज बोएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय स्कूलों के साथ एमओयू कर उनके शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित करेगा, जो आगे विद्यार्थियों को नवाचार और स्टार्टअप की बारीकियां सिखाएंगे।
विश्वविद्यालय पहले से ही युवाओं में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है। स्टार्टअप को रजिस्टर करने से लेकर उनकी हैंड होल्डिंग, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंचाने में सहयोग दिया जा रहा है। इसके साथ ही नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई कंपनी के माध्यम से भी स्टार्टअप गतिविधियों को गति दी जा रही है।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने 200 करोड़ रुपये का कार्पस फंड तैयार किया है। इसके तहत स्टार्टअप से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए संबद्ध संस्थानों को बजट देने की नियमावली अंतिम चरण में है। प्रस्ताव है कि प्रत्येक संबद्ध कॉलेज को दो-दो लाख रुपये दिए जाएं, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों के नवाचार को मूर्त रूप दिया जा सके। इसमें यूपी इलेक्ट्रानिक्स से एप्रूव इनक्यूबेशन सेंटर को लिया जाएगा। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि स्कूलों में सीधे फंडिंग संभव नहीं है, इसलिए शिक्षकों को प्रशिक्षित कर उनके माध्यम से छात्रों तक नवाचार की जानकारी पहुंचाई जाएगी।
स्कूलों में बनेंगे इनोवेशन सेंटर
प्रो. पांडेय ने बताया कि योजना के तहत स्कूलों में इनोवेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां स्टार्टअप गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके। फिलहाल सीएमएस और डीपीएस के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसे जल्द ही अन्य स्कूलों तक विस्तारित किया जाएगा। विश्वविद्यालय का उद्देश्य है कि छात्र शुरुआती स्तर से ही नवाचार की समझ विकसित करें, ताकि उच्च शिक्षा में पहुंचने पर वे बेहतर स्टार्टअप और शोध कार्य कर सकें।