लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) द्वारा झारखंड स्टेट ओपन स्कूल (बोर्ड) के फर्जीवाड़े के मामले में उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय के पक्ष को सही ठहराया है। डबल बेंच ने सिंगल बेंच के पूर्व के निर्णय को बदलते हुए ऐसे छात्रों के प्रवेश निरस्त करने के निर्णय को सही बताया है। बता दे कि झारखंड सरकार ने पिछले साल बोर्ड को फर्जी बताते हुए इसकी सूचना जारी की, जिसके बाद एकेटीयू ने अपने यहां प्रवेशित विद्यार्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच की। एकेटीयू ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अगस्त 2019 में नामांकन के डिजिटल पोर्टल से झारखंड स्टेट ओपन स्कूल (बोर्ड) राची से उत्तीर्ण विद्यार्थियों के फर्जी नामांकन को पकड़कर उनका नामांकन निरस्त कर दिया था, जिसके बाद इन विद्यार्थियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थभ्। उच्च न्यायालय ने ऐसे विद्यार्थियों के पठन-पाठन को जारी रखने के लिए विवि को निर्देशित किया गया था। विवि ने उच्च न्यायालय के उक्त आदेश के विरुद्ध याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई उच्च न्यायालय की डबल बेंच में हुई। डबल बेंच ने जारी आदेश में एकेटीयू के शैक्षिक सत्र 2016-17, 2017-18, 2018-19 में झारखंड स्टेट ओपन स्कूल (बोर्ड) राची से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों में प्रवेशित छात्र/छात्राओं के नामांकन निरस्त कर दिए हैं। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि पूर्व में सिंगल बेंच के निर्णय के सापेक्ष डबल बेंच ने झारखंड स्टेट ओपन स्कूल (बोर्ड) रांची द्वारा निर्गत किये गये शैक्षिक प्रमाण पत्रों की वैधानिकता को ठीक नहीं पाया है। माननीय न्यायालय ने विवि द्वारा पूर्व में निरस्त किए गए प्रवेश को सही माना है। 10 जून को न्यायालय में पारित आदेश की अनुपालन में विश्वविद्यालय ने 95 संस्थाओं के 306 छात्र/छात्राओं का नामांकन निरस्त कर दिया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को निर्देशित किया है कि न्यायालय के आदेशानुसार यथोचित कार्यवाही सुनिश्चित करें।