डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि आयुर्वेद हमेशा से स्वास्थ्य के लिहाज से काफी कारगर रहा है। हर विश्वविद्यालय, स्कूल-कॉलेज, शिक्षण संस्थान अपने यहां छोटी-बड़ी औषधि वाटिका विकसित करें, ताकि बच्चों और शिक्षकों को इसके बारे में जागरूक किया जा सके। हमें औषधीय पौधों के साथ उनके नाम और कौन सा पौधा किस काम में आता है, इसकी तख्ती भी लगानी चाहिए। इससे सामान्य लोगों को भी पढ़ने, समझने में आसानी होगी।
जानें किन औषधियों का क्या है उपयोग
अजवाइन- पेट दर्द, पेट के कीड़े मारने के लिए
अडूसा- खांसी में कफ को पतला करने में
अतिबला- दुर्बलता, खूनी दस्त में, सूखा रोग में
अदरक- बल की वृद्धि, जोड़ो के दर्द, सूजन में
अपामार्ग- सूजन कम करने, मूत्राशय एवं सूजन में
अमलतास- मूत्ररोगों, दर्द एवं सूजन कम करने, कब्ज में
अश्वगंधा- बलवर्धक, गर्भाशय की समस्या को दूर करने में, जोड़ो के दर्द में
कचनार- गले में गांठ, लसिका ग्रंथियों की वृद्धि में
कटुकरंज- मलेरिया, प्रसव के बाद होने वाले बुखार, चर्म रोग में
कनफटी- जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द, कान दर्द में
कालमेघ- बुखार, मलेरिया, सिर दर्द, घाव में
नरकचूर- मिचली-उल्टी में, शिशुओं की खांसी में
नागरमोथा- आमदोष, जोड़ों के दर्द, बुखार, दस्त
निर्गुंडी- बुखार, वात, सूजन, खांसी, दमा, जुकाम
पुनर्नवा- सूजन कम करने, गुर्दे की बीमारी, उच्चरक्त चाप, हृदय रोग
बला- नाड़ियो में बल, शुकल और गर्भस्थापन, स्वप्न दोष, कब्ज
बाकुची- व्रणशोधक, व्रणरोपण, सफेद दाग, पेट के कीड़े मारने में
ब्राह्मी- स्मरण शक्तिवर्धन, खून बढ़ाने, चर्म रोग समाप्त करने में
भुई आंवला- पीलिया, पेचिस, जख्म/घाव, त्वचा रोग, मलेरिया में
मीठी नीम- अतिसार, अपच, गुर्दों के दर्द में
वच- जुकाम, खांसी, बुखार, हकलाने में
शतावर- दूध बढ़ाने में, शक्तिवर्धक
सर्पगंधा- अनिद्रा, पुराने मानसिक रोगों में
सारिवा- फोड़े-फुंसी, त्वचा विकारों, गंडमाला में
हरड़- कब्ज, यकृत, प्लीहा की सूजन में।