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'पहले दो दिन, फिर एक हफ्ता, जापान से लौटे तो मांग रहे 50 दिन'

Tue, 15 Nov 2016 01:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ में सोमवार को यहां एक कार्यक्रम में पीएम मोदी का नाम लिए बगैर कहा, ‘पहले दो दिन कहा, फिर एक हफ्ते में सब ठीक होने की बात की, लेकिन जापान से लौटे तो 50 दिन मांगने लगे।
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सवाल ये है कि जो लोग 500 के जाली नोट छाप रहे थे, वे 2000 के नोट क्यों नहीं छाप पाएंगे? 1000 रुपये रखने वाले 2000 रुपये रखकर कालाधन नहीं बनाएंगे, इसकी क्या गारंटी है?

प्रधानमंत्री किसानों की बात करते हैं। फसल बीमा की बात करते हैं, लेकिन किसानों के पास जब पैसा होगा तभी तो वे बोआई कर पाएंगे। वर्तमान सहालग में बड़ी संख्या में किसान परिवारों की बेटियों की शादी होनी है, लेकिन इसके लिए उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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खरीफ  फसल की उपज को बेचकर किसानों ने जो रकम इकट्ठी की है, नोटबंदी के कारण वे उसका भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
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किसानों के सामने बीज-खाद का गंभीर संकट

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खेती-किसानी के सीजन में 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी से हो रही मुश्किलों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से खाद-बीज की खरीद के लिए पुरानी करेंसी को मान्य करने की मांग की है। उन्होंने नोटबंदी से बढ़ी मुश्किलों की चर्चा करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा।

कहा, किसानों के सामने रबी फसल की बोआई के लिए बीज-खाद बीज-खाद व अन्य कृषि निवेशों के इंतजाम का गंभीर संकट पैदा हो गया है। समाज के अन्य वर्गों को भी म‌ुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति सामान्य होने में लगेगा वक्त
मुख्यमंत्री ने कहा, मैंने मुख्य सचिव से पूछा कि प्रदेश के बैंकों में कितनी रकम है? उनका कहना था कि स्थिति सामान्य होने में दो-ढाई महीने लग जाएंगे। मुझे तो लगता है कि इससे भी ज्यादा समय लग सकते हैं।

कालाधन, भ्रष्टाचार के सभी विरोधी हैं, लेकिन इसके लिए सभी को मिलकर संकल्प लेना होगा। तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है।
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मोदी का भाषण सुन जवाब देना चाहते थे सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बैंक बंद हैं, इसलिए यहां सभागार भरा है, वरना लोग बैंकों की लाइन में लगे होते। उन्होंने प्रधानमंत्री की गाजीपुर यात्रा की ओर संकेत करते हुए कहा कि वह किसी का भाषण सुनकर आना चाहते थे।

उनका, जिन्होंने सबको तकलीफ दी, परेशानी बढ़ा दी। भाषण सुन लेते तो उनका जवाब देना ज्यादा ठीक हो जाता, लेकिन उदय प्रतापजी के फोन पर भाषण सुने बिना चला आया।
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