सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि पांच राज्यों के चुनावों में विचारधारा के आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है। जनता ने जता दिया है कि सांप्रदायिकता और विभाजनकारी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं है। अहंकार और फरेब की राजनीति अब चलने वाली नहीं है। देश के गरीबों, नौजवानों, किसानों और कमजोर वर्ग के लोगों की उपेक्षा के परिणाम अच्छे नहीं होते हैं।
अखिलेश यादव ने बयान में कहा कि आजादी की लड़ाई के समय जो मूल्य स्थापित हुए थे, वे आज की राजनीति में भी मानक हैं। उनका तिरस्कार करने वालों की जिंदगी ज्यादा नहीं हो सकती है। भारत सामाजिक सद्भाव और परस्पर सौहार्द की आधारशिला पर टिका है। संवैधानिक मर्यादाओं से खिलवाड़ और नफरत की राजनीति करने की साजिशें जनता की निगाह से छुपी रहने वाली नहीं है।
उन्होंने कहा, विडंबना है कि भाजपा नेतृत्व दो तरह की बातें कर रहा है। वह अपने कार्यकर्ताओं को भी बहकाने में लगा है। अपनी हार से कोई सबक सीखने के बजाय उल्टे हार से निराश न होने और 2019 के चुनाव की बात कर रहा है। लोकतंत्र में जनादेश को सम्मानजनक तरीके से बिना किसी लागलपेट के पूरी ईमानदारी से स्वीकार करना चाहिए। लेकिन, भाजपा लगता है अपनी जनविरोधी नीतियों में बदलाव नहीं लाना चाहती हैं। जन समस्याओं से मुंह फेरने का नतीजा उसके सामने है।
सपा अध्यक्ष ने कहा, नोटबंदी और जीएसटी से आर्थिक संकट गहराया है। व्यापार चौपट हुआ है और बेरोजगारी बढ़ी है। इसे स्वीकार करने को भाजपा नेतृत्व अब भी तैयार नहीं है। भाजपा की आर्थिक-सामाजिक नीतियों से देश को बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, सपा ने हमेशा सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। समाज को बांटने वाली ताकतों का विरोध किया है।