पूर्व मुख्यमंत्री व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में जब सपा की सरकार थी तो भाजपा के लोग यह आरोप लगाते थे कि सिर्फ यादव जाति के अधिकारियों को ही पोस्टिंग दी जा रही है। लेकिन अब मैं सूबे के मुख्यमंत्री से सवाल पूछता हूं कि वह किस जाति के अफसरों को तैनात कर रहे हैं। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव भाजपा ने नहीं संघ ने जीता है।
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अखिलेश ने कहा कि योगी सरकार में भी जाति के आधार पर हो रही अधिकारियों के तैनाती की समीक्षा होनी चाहिए। सपा सरकार की योजनाओं की जांच कराने के मुद्दे पर भी अखिलेश ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
कहा, जिन अधिकारियों की जांच हो रही है, वह अधिकारी भी तो योगी के साथ है और वहीं काम कर रहे हैं। ऐसे में जांच किसकी होगी। एक निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश जनता के सवालों का जवाब दे रहे थे।
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गोमती रिवर फ्रंट और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे समेत सपा सरकार के कार्यकाल की अन्य योजनाओं की जांच कराए जाने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि ये अच्छी बात है कि योगी जांच करा रहे हैं। सब साफ हो जाएगा और जनता को भी सच्चाई पता चल जाएगी।
जिनकी जांच हो रही वो ही योगी सरकार में कर रहे हैं काम
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उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की जांच कराई जा रही है वह अधिकारी आज भी योगी सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सहारनपुर व मथुरा की घटना और गोरखपुर में भाजपा विधायक द्वारा आईपीएस अधिकारी के साथ किया गया दुर्व्यवहार समझने के लिए काफी है कि सूबे की कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी बदहाल हो चुकी है।
योगी सरकार में भी पांच मुख्यमंत्री होने के जुमले की चर्चा करते हुए अखिलेश ने कहा कि सपा की सरकार थी भाजपा के लोग तीन मुख्यमंत्री होने का जुमला उछालते थे, लेकिन आज तो पांच मुख्यमंत्री हैं। इस पर भी भाजपा को जवाब देना चाहिए।
किसानों का आय को दोगुना करने के वादे को धोखा बताते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि सभी किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था और वक्त आया तो सिर्फ 81 लाख किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की है। वह भी रिजर्व बैंक तैयार नहीं हो रहा है।
पीएम से अधिक काम कर सकते हैं सीएम
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यूपी के विकास के लिए योगी आदित्यनाथ को सुझाव देते हुए अखिलेश ने कहा कि यूपी तो इतना बड़ा प्रदेश है कि अगर सीएम चाहें तो पीएम से अधिक काम कर सकते हैं। बशर्ते उन्हें भाजपा के जातिगत एजेंडे से बाहर आकर काम करना होगा।
सपा समझाती रही, वो बहकाते रहे
विस चुनाव में सपा की हार की कारणों के बारे में अखिलेश ने कहा कि सूबे की जनता को काम नहीं पसंद आया और भाजपा के वादे व नारे पंसद आए। सपा समझाती रही और भाजपा जनता को बहकाती रही। हम जनता को समझाने में नाकामयाब रहे।
उन्होंने कहा कि वैसे भी विस चुनाव की जीत भाजपा की नहीं थी, बल्कि संघ ने चुनाव जीता है। उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव जीतना सपा के लिए आसान होगा क्योंकि, उस समय भाजपा केन्द्र के 5 साल और राज्य सरकार के 2 साल के कार्यकाल का हिसाब जनता को देना होगा। भाजपा के पास बताने के लिए कुछ नहीं होगा।
30 सितंबर के बाद चुनाव तय करेगा अध्यक्ष का नाम
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मलायम सिंह को अध्यक्ष बनाने के वादे से मुकरने को लेकर पूछे गए सवाल के जबाव में अखिलेश ने कहा कि इसमें वादे से मुकरने जैसी कोई बात नहीं है। पार्टी का एक संविधान है और पदाधिकारियों का चुनाव भी उसी के तहत होता है।
उन्होंने कहा कि इस समय पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है और 30 सितंबर के बाद पार्टी का संगठनात्मक चुनाव होगा। जिसमें पार्टी तय नये अध्यक्ष का नाम तय करेगी।
शिवपाल से राजनीति के पीछे हैं कायम हैं पुराने रिश्ते
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चाचा शिवपाल के खराब रिश्ते को लेकर पूछे गए सवाल केजवाब में अखिलेश ने कहा है कि राजनीति अपनी जगह, रिश्ते अपनी जगह। राजनीति के पीछे के जो रिश्ते हैं वह रहेंगे। रही बात उनके अलग पार्टी बनाने की तो यह अधिकार सभी को है कि वह अलग पार्टी बना सकता है। उन्होंने कहा कि असली झगड़ा यह थी सूबे में अगली सरकार सपा की न बने।
बड़े लोगों के बीच की बात नहीं पूछनी चाहिए
योगी आदित्यनाथ से शपथ ग्रहण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व सपा के संरक्षक मुलायम सिंह के बीच कान में हुई बातचीत के बारे में पूछे जाने पर अखिलेश ने कहा कि बड़े लोगों के बीच की बातचीत को नहीं पूछना चाहिए। वैसे वही मान लीजीए जो सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चुटकुले चल रहे हैं।