अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस यात्रा को गंगा की सफाई से जोड़ते हैं लेकिन इसका असल मकसद आस्था का झूठा प्रदर्शन कर बजट को खुर्द-बुर्द करना है। गंगा मैया के नाम पर धोखे का यह धंधा 1985 से चला जो 2000 में बंद हुआ। इस दौरान लगभग 900 करोड़ रुपये खर्च हुए। सन 2014 में भाजपा फिर गंगा सफाई में जुट गई।
निर्मल गंगा के लिए कई ने अपनी जानें दे दीं, पर भाजपा सरकार की संवेदना नहीं जगी। कई गांव नदी की कटान में उजड़ गए, उनको मुआवजा नहीं मिला। दबंगों ने कश्यप समाज की गंगा किनारे की जमीनें कब्जा लीं।
बिजनौर के देवलगढ़ राजा रामपुर गांव में दो लोग गंगा में डूबकर मर गए। स्थानीय लोग डेढ़ माह तक गंगा में खड़े होकर मृतकों को मुआवजा और गंगा पर पुल की मांग करते रहे, पर कुछ नहीं हुआ।