किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के गांधी वार्ड में 48 घंटे तक इलाज न मिलने से नवजात की मौत की घटना पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद खफा हैं। उन्होंने केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत से भी अपनी सर्वाजनिक नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि केजीएमयू को अभी सरकार ने नौ सुपर स्पेशिलिटी विभाग दिए हैं और भी संसाधन दिए जा रहे हैं। लेकिन गांधी वार्ड जैसी घटना को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉक्टरों के व्यवहार से भी आहत नजर आए। उन्होंने कहा, कुछ डॉक्टर खुद को कानून, व्यवस्था व संविधान से ऊपर समझते हैं। व्यवस्था को कुछ नहीं समझते, ऐसे डॉक्टरों को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री अखिलेश अपने सरकारी आवास 5-कालिदास मार्ग पर स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त की।
कार्यक्रम में सामने बैठे कुलपति प्रो. रविकांत से कहा कि इस तरह का रवैया अच्छी बात नहीं है। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी कहा है।
सीएम बोले-कुछ डॉक्टरों को बहुत घमंड है
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को डॉक्टरों के रवैये से भी नाराज नजर आए। उन्होंने कहा कि कुछ डॉक्टर ऐसे हैं जहां उनकी ड्यूटी लगाई जाती हैं तो वे वहां जाते ही नहीं हैं।
कई ऐसे डॉक्टर भी हैं जो इस विभाग के नहीं हैं, वे इससे जुड़े दूसरे विभाग के हैं। मुख्यमंत्री का इशारा चिकित्सा शिक्षा विभाग से था। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘...कुछ डॉक्टरों को बहुत घमंड है...वे अपने आपको कानून, व्यवस्था व संविधान से ऊपर समझते हैं। उनके संपर्क बहुत अच्छे हैं।
उनका उठना-बैठना काफी अच्छी जगह है...। इसलिए वे व्यवस्था को भी कुछ नहीं समझते हैं। लेकिन देश व प्रदेश कानून से चलता है। हम संविधान से बंधे हुए लोग हैं।’ मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि अगर किसी के साथ कड़ी कार्रवाई हो जाए तो जिस तरह दोनों आंख एक बराबर दिखाती हैं, इसे भी वैसा ही देखना जैसा आप देख रहे हो।
हालांकि मुख्यमंत्री ने यह नहीं खुलासा किया कि वे किस पर कार्रवाई के संकेत दे रहे हैं। लेकिन तय है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के किसी बड़े अधिकारी पर जल्द ही बड़ी कार्रवाई होने वाली है।
ये था पूरा मामला
केजीएमयू के गांधी वार्ड में लखनऊ निवासी 28 वर्षीय गर्र्भवती महिला मीरा गुप्ता एडमिट थीं। प्रसव पीड़ा की शिकायत हुई तो डॉक्टरों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
बाद में यह महिला शौचालय गई तो टॉयलेट सीट पर ही बच्ची को जन्म दे दिया। बच्ची सीधे पॉट में जाकर गिरी। बाद में, मरीज की देवरानी ने बच्ची को उससे निकाला।
लेकिन, किसी भी डॉक्टर ने उसे हाथ नहीं लगाया। 48 घंटे इलाज न मिलने के कारण नवजात की मौत हो गई थी।