समाजवादी कुनबे में आखिरकार पिता मुलायम यादव व चाचा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को मुख्यमंत्री अखिलेश के आगे ‘सरेंडर’ करना ही पड़ा। अखिलेश की ‘सत्ता’ के आगे घुटने टेकना इसलिए भी मजबूरी बन गई क्योंकि पार्टी ही नहीं, परिवार में भी दोनों अलग-थलग पड़ गए थे।
सबसे बड़ा होने के नाते मुलायम को भले ही ‘मुखिया’ माना जाता हो, पर परिवार के ज्यादातर सदस्यों का समर्थन अखिलेश के साथ है। लिहाजा पार्टी के साथ-साथ परिवार में भी बिखराव रोकने के लिए मुलायम को न सिर्फ बेटे के आगे झुकने को मजबूर होना पड़ा बल्कि उन्होंने शिवपाल को भी इसके लिए तैयार किया।
विधानसभा चुनाव से पहले सपा में दो फाड़ और अखिलेश-शिवपाल के बीच आर-पार की जंग छिड़ जाने से सियासी नुकसान के साथ-साथ मुलायम परिवार में भी टूट की आशंका नजर आने लगी थी। दबाव कोई भी रहा हो, पर मुलायम ने अखिलेश को पार्टी से बाहर करने की घोषणा बेमन से ही की थी। शायद यही वजह रही कि निष्कासन के महज 19 घंटे बाद अखिलेश जब आजम खां के साथ अपने पिता मुलायम से मिलने पहुंचे तो रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल गई।
यह दीगर बात है कि पिता-पुत्र के बीच पैदा हुई खाई को पाटने में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व मुलायम के रिश्तेदार लालू प्रसाद यादव व आजम ने भी अहम भूमिका निभाई। पिता-पुत्र मिले तो शिवपाल को भी मुलायम के घर बुला लिया गया। गिले-शिकवे दूर कराने की कोशिशें हुईं और पहले की तरह एक बार फिर विवाद खत्म हो जाने का राग छेड़ते हुए एकता का संदेश देकर सियासी ड्रामेबाजी का पटाक्षेप करने का प्रयास किया गया।
पांच में से चार लोकसभा सांसद ‘टीपू’ के साथ
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
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सपा सुप्रीमो को मिलाकर लोकसभा में सपा के कुल पांच सांसद हैं। ये सभी मुलायम परिवार से ही हैं। मुलायम को छोड़कर बाकी चार एमपी डिम्पल यादव, धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव तथा तेजप्रताप सिंह यादव अखिलेश के साथ हैं। यानी संसदीय बोर्ड में भी अखिलेश का ही दबदबा है। अलबत्ता राज्यसभा सदस्यों रामगोपाल यादव व नरेश अग्रवाल जहां अखिलेश के साथ हैं, वहीं बेनी प्रसाद वर्मा, अमर सिंह व रेवती रमण सिंह मुलायम के खास माने जाते हैं। मुलायम परिवार के कई अन्य सदस्य जो सक्रिय राजनीति में नहीं हैं, वे भी अखिलेश के पक्ष में बताए जाते हैं।
शिवपाल के साथ पत्नी, बेटा, प्रतीक व अपर्णा
वर्चस्व की लड़ाई में मुलायम भले ही भाई शिवपाल के साथ खड़े नजर आ रहे हों, पर परिवार के समर्थन के नाम पर शिवपाल के साथ पत्नी सरला, बेटा आदित्य तथा दूसरे भतीजे प्रतीक व उनकी पत्नी अपर्णा ही हैं। पार्टी के साथ-साथ परिवार पर भी शिवपाल की पकड़ कमजोर होने से अखिलेश का पलड़ा भारी है।