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UP: 'मुख्यमंत्री आवास के नीचे भी शिवलिंग, इसकी भी हो खोदाई...', अखिलेश बोले- उनके हाथ में विनाशकारी रेखाएं हैं

Sun, 29 Dec 2024 02:43 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने संभल मामले पर एक बार फिर सरकार को घेरा। कहा कि मुख्यमंत्री आवास के नीचे भी शिवलिंग है। इसकी भी खोदाई हो। 
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अखिलेश यादव - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एंव सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रविवार को पत्रकार वार्ता की। उन्होंने बिना नाम लिए भाजपा एवं योगी सरकार को घेरा। कहा कि मुख्यमंत्री आवास के नीचे भी शिवलिंग है। इसकी भी खोदाई होनी चाहिए। 

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सपा मुखिया ने योगी का नाम लिए बिना कहा कि उनके हाथ में विकास की नहीं, विनाश की रेखाएं हैं। कभी भी उनके हाथ की रेखाएं देख लेना। यह प्रदेश को कर्ज में डुबोकर जाएंगे। 2027 में सरकार का खजाना खाली करके जाएंगे।

कुंभ में लोग स्वयं आते हैं

सपा प्रमुख अने कहा कि अगर हमारे कार्यकर्ताओं पर मुकदमे लगे तो कुंभ मेले में अव्यवस्था की पूरी पोल खोल देंगे। कुंभ में आने का किसी को आमंत्रण नहीं दिया जाता है, लोग स्वय कुंभ में आते हैं। सरकार ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे कुंभ से पहले शुरू हो जाएगा। क्या यह चालू हुआ?

अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना-शिवपाल

अखिलेश ने कहा कि यहां ईवीएम के कारण हारने वाले को हार का एवं जीतने वाले को जीत का विश्वास नहीं होता है। इसलिए हम मांग करते हैं कि बैलेट से ही चुनाव कराया जाए। सपा महासचिव शिवपाल ने कहा कि नये साल पर बधाई। देश में ऐसा काम करना है कि 2027 का मिशन सपा सरकार बनाकर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है।

संभल में इंसानी जिंदगियां जाने का मुद्दा बड़ा है

इससे एक दिन पहले अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार की साजिशों को पीडीए समझ चुका है। आम चुनाव में जवाब देगा। कहा कि भाजपा आगामी चुनाव के बाद नीतीश को बिहार का सीएम नहीं बनाएगी। अदाणी से बड़ा संभल में इंसानी जिंदगियां जाने का मुद्दा है।

आरक्षण पर डाका जा रहा

कहा कि योगी आदित्यनाथ धार्मिक सीएम तो हैं, पर विजिनरी (दूरगामी सोच वाले) नहीं। सपा सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से मॉडल पेश किए। पीडीए यानी पिछड़े, दलित व अल्पसंख्यक या कहें पीड़ित, दुखी और अपमानित लोग सपा के साथ हैं। वे देख रहे हैं कि किस तरह से आरक्षण पर डाका जा रहा है। संविधानिक मूल्यों को किनारे किया जा रहा है।

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