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अखिलेश ने कहा : संसद के उद्घाटन समारोह में नहीं जाएंगे, सम्मान निधि के नाम पर किसानों को धोखा दे रही भाजपा

Wed, 24 May 2023 10:13 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव संसद विवाद में कूद गए हैं। उन्होंने बुधवार को ट्वीट किया कि भाजपाइयों द्वारा संसद के दिखावटी उद्घाटन से नहीं बल्कि वहां पर लिखे श्लोक की मूल भावना को समझकर सभी को सुनने व समझने का बराबर अवसर देना ही सच्ची संसदीय परंपरा है।
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अखिलेश यादव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार किसानों को अब मामूली सम्मान निधि के नाम पर भी धोखा दे रही है। किसानों को उनका हक न देने के लिए सरकार तरह-तरह के नियम बनाकर उलझाती है, जिससे किसान सरकार के बनाए नए-नए नियमों, कानूनों के चक्कर में फंसा रहे।

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जारी बयान में सपा अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के नौ साल हो गए। फिर भी किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई। भाजपा किसानों को भ्रमित करने के लिए नए- नए कार्यक्रम घोषित करती है। भाजपा सरकार में आलू किसान बर्बाद हो गया है। गन्ना की लागत बढ़ी पर सरकार ने गन्ने की कीमत नहीं बढ़ाई। गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर अभी भी हजारों करोड़ रूपये बकाया है। गन्ना किसान परेशान है। इसी तरह से प्रदेश में किसानों के गेंहू की सरकारी खरीद नहीं हो पाई। भाजपा सरकार पूंजीपतियों की पोषक है।

पीड़ितों को दी मदद
मुरादाबाद के कुंदरकी के ग्राम पंडिया निवासी छात्रा और उसके परिजनों ने बुधवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। सपा अध्यक्ष ने उन्हें सहायता के रूप में एक लाख का चेक किया। मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, विधायक नगीना मनोज पारस आदि मौजूद रहे।
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गुलशन बने प्रतापगढ़ के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष
समाजवादी पार्टी ने कुंडा से पार्टी प्रत्याशी रहे गुलशन यादव को प्रतापगढ़ का कार्यवाहक जिलाध्यक्ष और अब्दुल कादिर जिलानी को जिला महासचिव मनोनीत किया है। यह जानकारी सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने दी।

संसद विवाद में कूदे अखिलेश, उद्घाटन समारोह में नहीं जाएंगे
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव संसद विवाद में कूद गए हैं। उन्होंने बुधवार को ट्वीट किया कि भाजपाइयों द्वारा संसद के दिखावटी उद्घाटन से नहीं बल्कि वहां पर लिखे श्लोक की मूल भावना को समझकर सभी को सुनने व समझने का बराबर अवसर देना ही सच्ची संसदीय परंपरा है। जहां सत्ता का अभिमान हो लेकिन विपक्ष का मान नहीं, वो सच्ची संसद हो ही नहीं सकती है। उसके उद्घाटन में क्या जाना? इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत का श्लोक भी ट्वीट किया है।

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