सपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर सरकार का गरीब मजदूरों के प्रति ऐसा ही दुर्भावनापूर्ण और उपेक्षापूर्ण व्यवहार बना रहा तो भला किस पर विश्वास कर ये मजदूर अपने काम पर वापस लौटेंगे? अमीरों की इस सरकार ने अब तो श्रम कानूनों का रक्षा कवच भी छीन लिया है।
प्रदेश में प्रशासन के पंगु होने से जैसी अफरा-तफरी मची है, उससे साबित होता है कि समाज में दूरी पैदा करने वाली भाजपा का सारा ध्यान कोरोना नियंत्रण और गरीब को रोजी-रोटी की सुविधा देने पर नहीं, अपनी चुनावी चालों पर है।